CANADA में PR पाना हुआ मुश्किल, भारतीयों और खासकर पंजाबियों को सबसे बड़ा झटका
CANADA में स्थायी रूप से बसने का सपना देखने वाले भारतीयों, खासकर पंजाब के युवाओं के लिए नई इमिग्रेशन रिपोर्ट चिंता बढ़ाने वाली है। कनाडा के इमिग्रेशन, रिफ्यूजीज़ एंड सिटिजनशिप विभाग (IRCC) के ताजा आंकड़ों के अनुसार, वर्ष के पहले पांच महीनों में नए स्थायी निवास (पीआर) देने की संख्या में उल्लेखनीय कमी दर्ज की गई है। इस गिरावट का सबसे अधिक असर भारतीय आवेदकों पर पड़ा है।
भारतीयों की पीआर मंजूरी में बड़ी कमी
आंकड़ों के मुताबिक, पिछले वर्ष जनवरी से मई के बीच 1,68,800 लोगों को कनाडा की स्थायी नागरिकता मिली थी, जबकि इस वर्ष यही संख्या घटकर 1,47,260 रह गई। यानी कुल 12.5 प्रतिशत की गिरावट दर्ज हुई। भारतीयों की बात करें तो पिछले वर्ष इसी अवधि में 49,115 भारतीयों को पीआर मिली थी, जो इस वर्ष घटकर 36,910 रह गई। कुल कमी का लगभग 57 प्रतिशत हिस्सा अकेले भारतीयों का रहा, जिससे स्पष्ट है कि सबसे अधिक प्रभाव भारत पर पड़ा है।
सरकार ने बदली इमिग्रेशन नीति
विशेषज्ञों का मानना है कि कनाडा सरकार अब तेज़ी से इमिग्रेशन बढ़ाने के बजाय उसे नियंत्रित करने की नीति पर काम कर रही है। सरकार का उद्देश्य नए स्थायी निवासियों की संख्या को धीरे-धीरे सीमित करना है। कनाडा प्रशासन ने संकेत दिए हैं कि आने वाले वर्षों में प्राथमिकता उन लोगों को दी जाएगी जो पहले से कनाडा में रह रहे हैं, वहां काम कर रहे हैं और देश की अर्थव्यवस्था में योगदान दे रहे हैं।
2023 के बाद लगातार घट रहे आंकड़े
साल 2023 में भारतीयों को सबसे अधिक पीआर मिली थी और यह संख्या करीब 1.40 लाख तक पहुंच गई थी। इसके बाद लगातार गिरावट देखने को मिल रही है। वर्ष 2025 में कनाडा ने कुल 3,93,530 नए स्थायी प्रवासियों को अनुमति दी, जबकि 2024 में यह संख्या 4,83,655 थी। यानी एक साल में लगभग 19 प्रतिशत की कमी दर्ज हुई। इसी अवधि में भारतीय स्थायी निवासियों की संख्या भी 1,27,375 से घटकर 98,770 रह गई।
स्टडी वीजा पर भी दिखा असर
कनाडा की नई नीतियों का असर केवल पीआर पर ही नहीं बल्कि स्टडी वीजा पर भी दिखाई दे रहा है। वर्ष 2023 में लगभग 2.78 लाख भारतीय छात्रों को कनाडा में पढ़ाई के लिए मंजूरी मिली थी, लेकिन 2025 में यह संख्या घटकर 93,840 रह गई। मौजूदा वर्ष में भी स्टडी वीजा और स्थायी निवास दोनों श्रेणियों में पहले की तुलना में कम मंजूरियां मिलने के संकेत मिल रहे हैं, जिससे विदेश में पढ़ाई और बसने की योजना बना रहे हजारों भारतीय छात्रों और परिवारों के सामने नई चुनौतियां खड़ी हो गई हैं।
