सुप्रीम कोर्ट में मंगलवार को कॉकरोच जनता पार्टी के आह्वान पर हुए छात्र आंदोलन और संसद मार्च के दौरान पुलिस कार्रवाई से जुड़ी कई याचिकाओं पर सुनवाई हुई। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि सामने आए आरोप गंभीर हैं और इनकी निष्पक्ष जांच जरूरी है। अदालत ने फिलहाल दर्ज एफआईआर के आधार पर किसी भी प्रकार की दंडात्मक कार्रवाई नहीं करने का निर्देश दिया।
देश के कई राज्यों का मामला पहुंचा अदालत
याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता गोपाल शंकरनारायणन ने अदालत को बताया कि यह केवल दिल्ली तक सीमित मामला नहीं है। उन्होंने कहा कि मध्य प्रदेश, बिहार और नागपुर सहित कई स्थानों पर भी प्रदर्शन के दौरान इसी तरह की घटनाओं के आरोप सामने आए हैं। अदालत ने माना कि अलग-अलग याचिकाओं में कई समान शिकायतें दिखाई दे रही हैं, जिनकी एक साथ गंभीरता से जांच होनी चाहिए।
पैलेट गन और पुलिस कार्रवाई पर उठे सवाल
सुनवाई के दौरान अदालत के सामने पैलेट गन के इस्तेमाल, इलेक्ट्रिक बैटन के उपयोग, सिविल ड्रेस में मौजूद पुलिसकर्मियों की कथित हिंसा और नाबालिगों की हिरासत जैसे मुद्दे उठाए गए। याचिकाकर्ताओं ने दावा किया कि एक युवक की आंखों की रोशनी प्रभावित हुई, एक युवती गंभीर रूप से घायल होकर आईसीयू में भर्ती हुई और कुछ वकीलों तथा एक मीडियाकर्मी के साथ भी मारपीट की गई। अदालत ने इन सभी आरोपों की स्वतंत्र जांच की आवश्यकता पर जोर दिया।
नाबालिगों और वीडियो साक्ष्यों का भी उठा मुद्दा
बिहार से जुड़े मामले में अदालत को बताया गया कि बड़ी संख्या में नाबालिगों को हिरासत में लिया गया और उन्हें तय समय से काफी देर बाद मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया गया। सुनवाई के दौरान कुछ वीडियो और सीसीटीवी फुटेज का भी उल्लेख किया गया, जिनमें पुलिस कार्रवाई को लेकर सवाल उठाए गए। साथ ही यह मांग भी की गई कि उपलब्ध डिजिटल साक्ष्यों को सुरक्षित रखा जाए और फेस रिकग्निशन तकनीक का इस्तेमाल केवल कानूनी दायरे में ही हो।
उच्च स्तरीय जांच समिति बनाने के संकेत
सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची ने पुलिसकर्मियों के लिए सुरक्षा उपकरणों की उपलब्धता का मुद्दा भी उठाया। वहीं, मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा कि उपलब्ध तथ्यों को देखते हुए प्रथम दृष्टया स्वतंत्र जांच की आवश्यकता स्पष्ट दिखाई देती है। अदालत ने संकेत दिए कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच के लिए उच्च स्तरीय समिति या विशेष जांच दल (एसआईटी) गठित करने पर विचार किया जाएगा, ताकि सभी आरोपों और घटनाक्रम की निष्पक्ष तरीके से जांच हो सके।
