पंजाब के शिक्षा मंत्री हरजोत सिंह बैंस ने बड़ा खुलासा करते हुए कहा कि पंजाब पुलिस ने हरियाणा के भिवानी से संचालित एक अंतरराज्यीय नकल गिरोह का भंडाफोड़ किया है। उनके अनुसार यह गिरोह बाबा फरीद यूनिवर्सिटी ऑफ हेल्थ साइंसेज, फरीदकोट की फार्मेसी भर्ती परीक्षा में आधुनिक तकनीक की मदद से अभ्यर्थियों को नकल कराने की कोशिश कर रहा था। उन्होंने साफ कहा कि यह मामला पेपर लीक का नहीं, बल्कि तकनीक के जरिए संगठित नकल कराने का है।
हरियाणा सरकार पर साधा निशाना
प्रेस वार्ता के दौरान शिक्षा मंत्री ने आरोप लगाया कि हरियाणा में ऐसे नकल गिरोह लंबे समय से सक्रिय हैं, लेकिन उन पर प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई। उनका कहना था कि जब हरियाणा में कार्रवाई नहीं हुई तो इस नेटवर्क ने पंजाब में अपना दायरा बढ़ाने की कोशिश की। उन्होंने कहा कि पंजाब सरकार किसी भी कीमत पर शिक्षा व्यवस्था की पारदर्शिता से समझौता नहीं करेगी और राज्य में नकल के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति अपनाई गई है।
कैसे काम करता था पूरा रैकेट
मंत्री ने बताया कि गिरोह प्रतियोगी परीक्षाओं के अभ्यर्थियों से संपर्क करता था और उन्हें अत्याधुनिक इलेक्ट्रॉनिक उपकरण उपलब्ध कराता था। इसके लिए संशोधित के-33 मोबाइल फोन, छिपे हुए वायरलेस ईयरपीस और अन्य संचार उपकरणों का इस्तेमाल किया जाता था। परीक्षा शुरू होते ही प्रश्नपत्र की तस्वीरें गुप्त कैमरे से बाहर भेजी जाती थीं। इसके बाद हैंडलर प्रश्न हल करके कंट्रोल रूम तक पहुंचाते थे और वहां से वायरलेस माध्यम से अभ्यर्थियों को उत्तर बताए जाते थे।
पुलिस ने ऐसे किया पूरे नेटवर्क का खुलासा
आईजीपी नीलांबरी जगदले ने बताया कि 19 जुलाई को मिली खुफिया सूचना के आधार पर फरीदकोट के एक घर में छापा मारा गया। वहां एक अस्थायी कंट्रोल रूम बनाया गया था, जहां से परीक्षा के दौरान पूरी गतिविधि संचालित की जा रही थी। पुलिस ने मौके से छह हैंडलरों को गिरफ्तार कर लिया। अब तक इस मामले में 10 हैंडलरों और 25 अभ्यर्थियों को गिरफ्तार किया जा चुका है, जबकि तीन हैंडलर और चार अभ्यर्थी अभी भी फरार हैं।
बड़ी मात्रा में बरामद हुए हाईटेक उपकरण
कार्रवाई के दौरान पुलिस ने 38 संशोधित के-33 मोबाइल फोन, 21 अत्यंत छोटे वायरलेस ईयरपीस और दो वाहनों को जब्त किया। जांच में सामने आया कि मोबाइल फोन दिल्ली से खरीदे गए थे और उन्हें विशेष तरीके से संशोधित किया गया था। इनमें सामान्य स्क्रीन और स्पीकर हटाकर रेडियो फ्रीक्वेंसी ट्रांसमीटर लगाए गए थे। वहीं ईयरपीस इतने छोटे थे कि सामान्य जांच के दौरान आसानी से दिखाई नहीं देते थे।
किसी परीक्षा केंद्र के कर्मचारी की मिलीभगत नहीं मिली
आईजीपी ने स्पष्ट किया कि अब तक की जांच में किसी भी परीक्षा केंद्र के कर्मचारी, अधिकारी या पर्यवेक्षक की संलिप्तता सामने नहीं आई है। पुलिस के अनुसार पूरा नेटवर्क बाहरी लोगों द्वारा संचालित किया जा रहा था और अभ्यर्थियों के माध्यम से परीक्षा में अनुचित साधनों का इस्तेमाल किया जा रहा था। इस पूरे अभियान के दौरान विभिन्न परीक्षा केंद्रों पर 200 से अधिक पुलिस कर्मियों को तैनात किया गया था, जिससे समय रहते गिरोह की योजना विफल हो गई।
शिक्षा सुधारों का भी किया उल्लेख
हरजोत सिंह बैंस ने कहा कि पंजाब में शिक्षा व्यवस्था लगातार बेहतर हो रही है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2026 में 361 विद्यार्थियों ने जेईई मेन और 64 विद्यार्थियों ने जेईई एडवांस्ड परीक्षा पास की। वहीं नीट परीक्षा में सफल विद्यार्थियों की संख्या 2024 के 437 से बढ़कर 2026 में 882 हो गई है। उन्होंने इसे शिक्षा सुधारों और गुणवत्तापूर्ण शिक्षण का परिणाम बताया।
ब्लॉकचेन तकनीक पर भी हो रहा काम
शिक्षा मंत्री ने कहा कि भविष्य में परीक्षाओं को और अधिक सुरक्षित बनाने के लिए पंजाब स्कूल शिक्षा विभाग ब्लॉकचेन तकनीक के उपयोग की संभावनाओं पर भी काम कर रहा है। उनका कहना है कि नई तकनीकों के इस्तेमाल से परीक्षा प्रणाली को और अधिक पारदर्शी तथा विश्वसनीय बनाया जाएगा। साथ ही उन्होंने दोहराया कि विद्यार्थियों के भविष्य से खिलवाड़ करने वाले किसी भी व्यक्ति के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई जारी रहेगी।
