देश में मानसून अब भी 12% कमजोर, कुछ क्षेत्रों में अब भी बनी हुई है कमी
देशभर में इस साल दक्षिण-पश्चिम मानसून की शुरुआत धीमी रही, जिसका असर अब तक के कुल वर्षा आंकड़ों में भी दिखाई दे रहा है। 2 अगस्त तक देश में सामान्य से लगभग 12 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई है। हालांकि जुलाई के अंतिम दिनों और अगस्त की शुरुआत में कई राज्यों में हुई अच्छी बारिश से हालात पहले की तुलना में बेहतर हुए हैं।
मध्य भारत में सबसे बेहतर प्रदर्शन
भारतीय मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार मध्य भारत में मानसून ने अच्छी रफ्तार पकड़ी है। मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र और आसपास के कई क्षेत्रों में सामान्य से अधिक बारिश दर्ज की गई है। इन इलाकों में लगातार हुई वर्षा से जलाशयों का जलस्तर बढ़ा है और खरीफ फसलों की स्थिति में भी सुधार देखने को मिल रहा है।
कुछ क्षेत्रों में अब भी बनी हुई है कमी
जहां मध्य भारत में बारिश ने राहत दी है, वहीं देश के कुछ हिस्सों में अब भी सामान्य से कम वर्षा हुई है। मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि पूर्वोत्तर भारत और कुछ अन्य क्षेत्रों में बारिश की कमी बनी हुई है। ऐसे इलाकों में किसान अब भी अच्छी बारिश का इंतजार कर रहे हैं, क्योंकि खेती और जल भंडारण काफी हद तक मानसून पर निर्भर करता है।
इस सप्ताह अहम रहेंगे मौसम के हालात
मौसम विभाग का मानना है कि आने वाले दिनों में कई राज्यों में बारिश की गतिविधियां जारी रह सकती हैं। यदि सक्रिय मानसूनी सिस्टम बने रहते हैं तो कुछ क्षेत्रों में वर्षा की कमी और कम हो सकती है। वहीं भारी बारिश वाले इलाकों में प्रशासन को जलभराव और बाढ़ जैसी स्थितियों पर नजर रखने की सलाह दी गई है।
किसानों और बाजार की नजर मानसून पर
देश की कृषि व्यवस्था का बड़ा हिस्सा मानसून पर आधारित है। ऐसे में बारिश की स्थिति का असर खरीफ फसलों, जल भंडारण और खाद्य उत्पादन पर पड़ता है। विशेषज्ञों का कहना है कि अगस्त के दौरान होने वाली बारिश इस सीजन की तस्वीर काफी हद तक तय करेगी। यदि आने वाले दिनों में सामान्य या बेहतर वर्षा होती है तो कृषि क्षेत्र को और मजबूती मिल सकती है, जबकि बारिश में कमी रहने पर कई इलाकों में चुनौतियां बढ़ सकती हैं।
