पंजाब विधानसभा में शिक्षा और पेपर लीक के मुद्दे पर चर्चा के दौरान मुख्यमंत्री भगवंत मान ने कहा कि प्रश्न पत्र लीक होना केवल परीक्षा प्रणाली की विफलता नहीं, बल्कि गरीब और मेहनती छात्रों के सपनों पर सीधा प्रहार है। उन्होंने कहा कि ऐसी घटनाएं योग्य युवाओं का विश्वास कमजोर करती हैं और इन पर सख्त कार्रवाई की जरूरत है।
पेपर लीक के मामलों पर उठाए सवाल
मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2014 से अब तक देश में 93 पेपर लीक के मामले सामने आए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि इनमें से अधिकांश घटनाएं भाजपा शासित राज्यों में हुई हैं। उन्होंने कहा कि भर्ती और प्रतियोगी परीक्षाओं में पारदर्शिता बनाए रखना सरकारों की सबसे बड़ी जिम्मेदारी है।
इतिहास और शिक्षा को लेकर सरकार का रुख
भगवंत मान ने कहा कि पंजाब सरकार स्कूलों के पाठ्यक्रम में राज्य के गुरुओं और शहीदों के वास्तविक इतिहास को शामिल कर रही है। उन्होंने कहा कि इतिहास से छेड़छाड़ की किसी भी कोशिश का सरकार विरोध करेगी और नई पीढ़ी को सही ऐतिहासिक जानकारी देना जरूरी है।
शिक्षा क्षेत्र की उपलब्धियां गिनाईं
मुख्यमंत्री ने कहा कि पंजाब आज शिक्षा के क्षेत्र में देश के अग्रणी राज्यों में शामिल है। उन्होंने बताया कि सरकारी स्कूलों के 882 विद्यार्थियों ने इस वर्ष नीट परीक्षा उत्तीर्ण की है। साथ ही निजी स्कूलों की फीस पर नियंत्रण के लिए विधेयक लाया गया है और अब तक 68,500 से अधिक सरकारी नौकरियां पारदर्शी प्रक्रिया के माध्यम से दी जा चुकी हैं।
अभिभावकों से की खास अपील
मुख्यमंत्री ने माता-पिता से अपील की कि वे बच्चों पर केवल अधिक अंक लाने का दबाव न डालें। उन्होंने कहा कि हर बच्चे में अलग-अलग प्रतिभा होती है और उसकी रुचि तथा क्षमता के अनुसार आगे बढ़ने का अवसर मिलना चाहिए।
