पंजाब विधानसभा में E20 पेट्रोल को लेकर जोरदार चर्चा हुई। मुख्यमंत्री भगवंत मान ने कैबिनेट मंत्री हरपाल सिंह चीमा द्वारा लाए गए प्रस्ताव का समर्थन करते हुए कहा कि यह केवल राजनीति का नहीं बल्कि देश और आम लोगों से जुड़ा गंभीर मुद्दा है। उन्होंने कहा कि इस विषय पर सभी दलों को राजनीति से ऊपर उठकर सोचने की जरूरत है, क्योंकि इसका सीधा असर करोड़ों वाहन चालकों पर पड़ रहा है।
केंद्र सरकार से चार प्रमुख मांगें
मुख्यमंत्री ने विधानसभा में केंद्र सरकार के सामने मांगें रखीं। उन्होंने कहा कि लोगों को शुद्ध पेट्रोल और E20 पेट्रोल में से अपनी पसंद का विकल्प दिया जाए। साथ ही E20 पेट्रोल की कीमतों में तुरंत कमी की जाए। उन्होंने यह भी पूछा कि केंद्र सरकार इस फैसले के पीछे कोई स्पष्ट वैज्ञानिक आधार क्यों नहीं बता रही है और E20 के कारण वाहनों में आ रही समस्याओं को गंभीरता से क्यों नहीं लिया जा रहा।
वाहनों की माइलेज और इंजन पर असर का दावा
भगवंत मान ने कहा कि बिना पर्याप्त अध्ययन के E20 पेट्रोल को लागू किया गया है। उन्होंने कहा कि उपलब्ध सर्वेक्षणों के अनुसार E20 के इस्तेमाल से बड़ी संख्या में वाहनों की माइलेज कम हुई है और कई वाहनों के इंजन पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ा है। उन्होंने कहा कि यदि किसी ईंधन से लोगों का खर्च बढ़ता है और वाहन प्रभावित होते हैं, तो सरकार को इस पर दोबारा विचार करना चाहिए।
ट्रेड डील और आम लोगों के हित का मुद्दा
मुख्यमंत्री ने कहा कि केंद्र सरकार ने संसद में भी स्वीकार किया है कि E20 पेट्रोल के उपयोग से माइलेज में कमी आ सकती है। उन्होंने कहा कि यह फैसला बड़ी व्यापारिक नीतियों और कॉरपोरेट हितों से जुड़ा दिखाई देता है, जबकि इसका आर्थिक बोझ आम लोगों पर पड़ रहा है। उनके अनुसार सरकार को ऐसे किसी भी निर्णय से पहले उपभोक्ताओं के हितों को प्राथमिकता देनी चाहिए।
विधानसभा में पारित प्रस्ताव के माध्यम से पंजाब सरकार ने केंद्र से मांग की है कि E20 पेट्रोल नीति की दोबारा समीक्षा की जाए। राज्य सरकार चाहती है कि वाहन मालिकों को अपनी पसंद का ईंधन चुनने का अधिकार मिले और यदि E20 जारी रखा जाता है तो उसकी कीमतों में राहत दी जाए, ताकि आम लोगों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ न पड़े।
