रेलवे स्टेशनों पर यात्रियों को मिलने वाली सुविधाओं को लेकर CAG की रिपोर्ट में कई गंभीर कमियां सामने आई हैं। रिपोर्ट के अनुसार, जांच के लिए चुने गए 512 रेलवे स्टेशनों में से 458 यानी करीब 89 फीसदी स्टेशनों पर जरूरी सुविधाएं तय मानकों के मुताबिक नहीं मिलीं। कई स्टेशनों पर सुविधाएं मौजूद नहीं थीं, जबकि कुछ जगह जरूरत के मुकाबले उनकी संख्या कम थी।
कई स्टेशनों के पानी में मिला E. coli
रिपोर्ट में रेलवे स्टेशनों पर पीने के पानी की गुणवत्ता को लेकर भी चिंता जताई गई है। कोयंबटूर और पालक्कड़ जंक्शन के वॉटर कूलर के पानी में E. coli बैक्टीरिया पाया गया। इसके अलावा हैदराबाद, मुंबई के छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस, भिवंडी रोड, कल्याण, लोनावला और मधुपुर जैसे स्टेशनों के वॉटर कूलर के पानी में भी E. coli मिला।
59 स्टेशनों पर पानी की जांच नहीं हुई
CAG के मुताबिक, छह रेलवे जोन के 59 स्टेशनों पर पीने के पानी की बैक्टीरियोलॉजिकल जांच ही नहीं की गई। वहीं, 2022-23 और 2023-24 के दौरान कई स्टेशनों के प्लेटफॉर्म पर लगे नलों के पानी में टोटल कॉलिफॉर्म बैक्टीरिया भी पाए गए।
शौचालय और नलों की भी कमी
जांच में 201 स्टेशनों पर शौचालय, 403 स्टेशनों पर यूरिनल और 2,035 स्टेशनों पर पानी के नलों की कमी सामने आई। CSMT, हावड़ा, सियालदह, नई दिल्ली और मुंबई सेंट्रल जैसे बड़े स्टेशनों पर भी बैठने की जगह, शौचालय, डस्टबिन और इलेक्ट्रॉनिक ट्रेन इंडिकेटर जैसी सुविधाओं में कमियां मिलीं।
करोड़ों यात्री करते हैं सफर
रेलवे के NSG कैटेगरी में 5,908 स्टेशन शामिल हैं। वर्ष 2023-24 में इन स्टेशनों से रोजाना 7,424 से ज्यादा नॉन-सबअर्बन ट्रेनें चलीं और करीब 292.4 करोड़ यात्रियों ने इन ट्रेनों से सफर किया।
रेलवे को सुधार के निर्देश
रेलवे बोर्ड ने अप्रैल 2018 में स्टेशनों पर पीने का पानी, वेटिंग हॉल, सीटिंग, प्लेटफॉर्म शेल्टर, शौचालय, पंखे, फुट ओवरब्रिज और डस्टबिन जैसी जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराने के निर्देश दिए थे। CAG ने रेलवे को पानी की सप्लाई व्यवस्था की नियमित जांच और यात्रियों को दिए जाने वाले पेयजल की बेहतर गुणवत्ता जांच सुनिश्चित करने की सलाह दी है।
