पंजाब सरकार वरिष्ठ नागरिकों को सम्मानजनक, सुरक्षित और आत्मनिर्भर जीवन उपलब्ध कराने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। इसी दिशा में सामाजिक सुरक्षा, महिला एवं बाल विकास विभाग ने **”माता-पिता एवं वरिष्ठ नागरिकों का भरण-पोषण तथा कल्याण अधिनियम, 2007″ के प्रभावी क्रियान्वयन पर विशेष जोर दिया है। सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि राज्य का कोई भी बुजुर्ग आर्थिक असुरक्षा, उपेक्षा या पारिवारिक अनदेखी का शिकार न हो तथा उसे समय पर कानूनी और सामाजिक संरक्षण मिल सके।
सामाजिक सुरक्षा, महिला एवं बाल विकास मंत्री डॉ. बलजीत कौर ने कहा कि माता-पिता और वरिष्ठ नागरिकों की देखभाल करना केवल नैतिक जिम्मेदारी नहीं, बल्कि कानून द्वारा निर्धारित दायित्व भी है। यदि कोई बुजुर्ग स्वयं अपना भरण-पोषण करने में सक्षम नहीं है, तो उसकी संतान अथवा उत्तराधिकारी उसके भरण-पोषण के लिए कानूनी रूप से जिम्मेदार हैं। इस अधिनियम के माध्यम से वरिष्ठ नागरिकों को लंबी और जटिल न्यायिक प्रक्रिया से राहत देते हुए सरल, सुलभ और समयबद्ध व्यवस्था उपलब्ध कराई गई है, ताकि उन्हें शीघ्र न्याय मिल सके।
बुजुर्गों की सहायता के लिए पंजाब सरकार ‘एल्डर लाइन’ (राष्ट्रीय हेल्पलाइन 14567) का भी संचालन कर रही है। इस हेल्पलाइन के माध्यम से वरिष्ठ नागरिक मानसिक, कानूनी, सामाजिक अथवा शारीरिक समस्याओं के संबंध में निःशुल्क सहायता प्राप्त कर सकते हैं। सरकार का मानना है कि यह सेवा केवल शिकायत दर्ज कराने का माध्यम नहीं, बल्कि बुजुर्गों के लिए भरोसेमंद सहायता तंत्र है, जहां उनकी समस्याओं का संवेदनशीलता के साथ समाधान किया जाता है।
सरकार वरिष्ठ नागरिकों के स्वास्थ्य और जागरूकता को भी प्राथमिकता दे रही है। जिला स्तर पर जागरूकता अभियान चलाकर बुजुर्गों को उनके कानूनी अधिकारों की जानकारी दी जा रही है। साथ ही समय-समय पर विशेष स्वास्थ्य शिविर आयोजित कर उन्हें निःशुल्क स्वास्थ्य जांच और आवश्यक चिकित्सा सेवाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। इन अभियानों में स्वयंसेवी संस्थाओं और समाज के विभिन्न वर्गों की भी भागीदारी सुनिश्चित की जा रही है।
अधिनियम के तहत यदि कोई वरिष्ठ नागरिक भरण-पोषण या अन्य कानूनी सहायता चाहता है, तो वह अपने जिले के जिला सामाजिक सुरक्षा अधिकारी अथवा संबंधित उपमंडल मजिस्ट्रेट (एसडीएम) के समक्ष आवेदन कर सकता है। एसडीएम इस कानून के अंतर्गत **मेंटेनेंस ट्रिब्यूनल** के रूप में कार्य करते हैं और शिकायतों का समयबद्ध निस्तारण सुनिश्चित करते हैं। विशेष बात यह है कि आवेदन स्वयं वरिष्ठ नागरिक के अलावा उनका अधिकृत प्रतिनिधि या कोई मान्यता प्राप्त स्वयंसेवी संस्था भी प्रस्तुत कर सकती है।
इस कानून में वरिष्ठ नागरिकों की संपत्ति के अधिकारों की भी प्रभावी सुरक्षा की गई है। यदि कोई व्यक्ति देखभाल की शर्त पर बुजुर्ग की संपत्ति अपने नाम करवाने के बाद उनकी उपेक्षा करता है, तो मेंटेनेंस ट्रिब्यूनल को उस संपत्ति के हस्तांतरण को निरस्त करने का अधिकार प्राप्त है। इसके अलावा वृद्धाश्रमों की स्थापना और भरण-पोषण अधिकारियों की नियुक्ति जैसे प्रावधान भी वरिष्ठ नागरिकों के कल्याण को मजबूत बनाते हैं।
पंजाब सरकार का मानना है कि बुजुर्ग समाज की अमूल्य धरोहर हैं। उनका सम्मान, सुरक्षा और देखभाल केवल परिवार की ही नहीं, बल्कि पूरे समाज की साझा जिम्मेदारी है। प्रभावी कानूनी संरक्षण, त्वरित न्याय, हेल्पलाइन सेवाओं, स्वास्थ्य सुविधाओं और जागरूकता अभियानों के माध्यम से सरकार वरिष्ठ नागरिकों को सुरक्षित, सम्मानजनक और गरिमापूर्ण जीवन उपलब्ध कराने के लिए निरंतर कार्य कर रही है।
