भारत दुनिया के सबसे बड़े चीनी उत्पादक देशों में शामिल है। देश में हर साल करीब 300 से 350 लाख टन चीनी का उत्पादन होता है। लेकिन समस्या यह है कि भारत में पैदा होने वाली चीनी का बड़ा हिस्सा घरेलू बाजार में ही खप जाता है। मौजूदा समय में देश की सालाना खपत करीब 280 से 285 लाख टन है।
इस बार उत्पादन और खपत के बीच अंतर कम हुआ
2025-26 सीजन में शुद्ध चीनी उत्पादन करीब 279 लाख टन रहने का अनुमान है। यानी उत्पादन घरेलू खपत के मुकाबले थोड़ा कम पड़ रहा है। यही वजह है कि बाजार में उपलब्धता को लेकर दबाव बढ़ा है और कीमतों में तेज उछाल देखने को मिला है।
क्या इथेनॉल भी चीनी की कमी की वजह है?
चीनी की कीमत बढ़ने के बीच इथेनॉल का मुद्दा भी चर्चा में है। आंकड़ों के मुताबिक 2023-24 में करीब 34 मिलियन टन चीनी उत्पादन हुआ, जिसमें लगभग 2.20 मिलियन टन इथेनॉल उत्पादन की ओर डायवर्ट किया गया। 2024-25 में 29.70 मिलियन टन उत्पादन में से करीब 1.70 मिलियन टन इथेनॉल के लिए इस्तेमाल हुआ। वहीं 2025-26 में 32.40 मिलियन टन उत्पादन के मुकाबले करीब 3.10 मिलियन टन इथेनॉल की ओर गया।
इससे साफ है कि गन्ने और चीनी के एक हिस्से का इस्तेमाल इथेनॉल के लिए बढ़ा है, मौसम, गन्ने का उत्पादन, बाजार में उपलब्ध स्टॉक और त्योहारी मांग भी कीमतों को प्रभावित कर रहे हैं।
एक महीने में 30 से 40 फीसदी तक बढ़े दाम
चीनी की कीमतों में हाल के हफ्तों में तेज उछाल आया है। 20 अगस्त तक महाराष्ट्र में अधिकतम कीमत करीब ₹4,850 प्रति क्विंटल दर्ज की गई, जबकि असम की मंडी में भाव करीब ₹5,600 प्रति क्विंटल तक पहुंच गया। जयपुर में कीमत करीब ₹4,475 प्रति क्विंटल रही। रिपोर्ट के मुताबिक पिछले एक महीने में कई बाजारों में चीनी के दाम 30 से 40 फीसदी तक बढ़े हैं।
करीब 10 साल बाद चीनी आयात की नौबत
बढ़ती कीमतों और घरेलू उपलब्धता के दबाव के बीच केंद्र सरकार ने 31 अक्टूबर 2026 तक 10 लाख टन कच्ची चीनी के शुल्क-मुक्त आयात की अनुमति दी है। यह करीब एक दशक बाद भारत का बड़ा चीनी आयात कदम है। सरकार का मकसद घरेलू बाजार में सप्लाई बढ़ाना और आने वाले त्योहारी सीजन से पहले कीमतों पर दबाव कम करना है।
त्योहारों से पहले बढ़ सकती है मांग
अगस्त से नवंबर के बीच देश में त्योहारों का सीजन रहता है। इस दौरान मिठाई, बेकरी और खाद्य उद्योगों में चीनी की मांग बढ़ जाती है।
