भारत में आधार और UPI को डिजिटल इंडिया की पहचान माना जाता है। अब सरकार एक और बड़ी डिजिटल सुविधा लाने जा रही है—DigiPin। यह एक यूनिक डिजिटल आईडी होगी जो हर घर के पते को मिलेगी। इसका उद्देश्य देश के पते के सिस्टम को डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर में शामिल करना है, ताकि किसी भी लोकेशन को सटीक तरीके से ढूंढना आसान हो।
4×4 मीटर ब्लॉक्स में होगा बंटवारा
DigiPin प्रणाली के तहत पूरे देश को 4×4 मीटर के छोटे-छोटे ब्लॉक्स में बांटा जाएगा और हर ब्लॉक को एक यूनिक डिजिटल कोड दिया जाएगा। यह कोड आपकी लोकेशन का बिल्कुल सटीक पता बताएगा। यह सिस्टम शहरों के साथ-साथ गांव, पहाड़, जंगल और समुद्र किनारे बसे घरों के लिए भी लागू होगा। अब पूरे पते की जगह सिर्फ DigiPin डालना होगा और डिलीवरी एजेंट या विज़िटर सीधे सही स्थान पर पहुंच जाएंगे।
इंडिया पोस्ट की तकनीक और संसद में बिल
इस डिजिटल एड्रेस सिस्टम को भारतीय डाक विभाग ने तैयार किया है और यह प्रधानमंत्री कार्यालय की सीधी निगरानी में है। जल्द ही इसका ड्राफ्ट आम जनता से सुझाव लेने के लिए जारी किया जाएगा। साल के अंत तक इसका फाइनल वर्जन आ सकता है और संसद के शीतकालीन सत्र में इस पर कानून पास होने की उम्मीद है। इसके तहत एक नई अथॉरिटी बनाई जाएगी जो इस सिस्टम को मैनेज करेगी।
निजता और सुरक्षा में सुधार
रिपोर्ट्स के मुताबिक, वर्तमान में कई कंपनियां लोगों के पते का डेटा आसानी से साझा कर देती हैं। DigiPin आने के बाद यह काम मुश्किल हो जाएगा। हर पते को एक यूनिक डिजिटल आईडी मिलेगी, जैसे आज हर व्यक्ति की पहचान आधार से होती है। इससे यह सुनिश्चित होगा कि दो पते कभी मेल न खाएं और पते को लेकर कोई भ्रम न रहे।
सेवाओं में होगी तेजी और सटीकता
यह प्रणाली कोरियर, फूड डिलीवरी, बैंक लोन और सरकारी सेवाओं जैसी प्रक्रियाओं में सटीकता लाएगी। पते की स्पष्टता से गलत डिलीवरी और डेटा एंट्री की समस्याएं कम होंगी।
पते की समस्या और आर्थिक नुकसान
रिपोर्ट में बताया गया है कि भारत में पढ़ने-लिखने की समस्या के कारण कई लोग सही पते का मानकीकरण नहीं कर पाते, जिससे डिलीवरी और सेवाओं में भ्रम पैदा होता है। इस कारण देश में हर साल लगभग 10 से 14 अरब डॉलर (GDP का करीब 0.5%) खर्च हो जाता है। DigiPin के ब्लूप्रिंट में पते के रजिस्ट्रेशन के समय एक मानक प्रारूप अपनाने की योजना है, जिससे यह समस्या खत्म हो सके।
