पंजाब सरकार में कैबिनेट मंत्री हरजोत सिंह बैस को सिख धार्मिक मर्यादा के उल्लंघन के मामले में श्री अकाल तख्त साहिब द्वारा तनखैया करार दिया गया है। उन्हें श्रीनगर में आयोजित शहीदी समागम के दौरान मर्यादा के उल्लंघन के चलते अकाल तख्त साहिब तलब किया गया था।
जथेदार ने सुनाई धार्मिक सज़ा, मंत्री ने मानी गलती
श्री अकाल तख्त साहिब के जथेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गड़गज्ज ने बताया कि सामने आए तथ्यों से साफ हुआ है कि समागम के दौरान सिख परंपराओं का उल्लंघन हुआ। इस पर हरजोत सिंह बैस ने अपनी गलती स्वीकार की और अकाल तख्त ने उन्हें धार्मिक सज़ा सुनाई।
धार्मिक सज़ा में तीर्थ स्थलों की सेवा का आदेश
धार्मिक सज़ा के अनुसार, हरजोत बैस को सबसे पहले गुरुद्वारा गुरु के महल, जो नौवें पातशाह का जन्मस्थल है, तक पैदल चलकर जाना होगा और रास्तों की मरम्मत करवानी होगी। इसके बाद वे गुरुद्वारा कोठा साहिब तक 100 मीटर पैदल चलेंगे और वहां तक के रास्तों की भी दशा सुधारने का कार्य करेंगे।
दिल्ली और आनंदपुर साहिब में भी करनी होगी सेवा
इसके बाद मंत्री बैस को गुरुद्वारा सीस गंज साहिब दिल्ली और फिर गुरुद्वारा श्री आनंदपुर साहिब जाना होगा। आनंदपुर साहिब में उन्हें दो दिन तक जोड़ा घर सेवा करनी होगी और 1100 रुपये की कड़ाह प्रसाद की देग तैयार करवा कर अरदास करनी होगी।
“मेरे लिए अकाल तख्त से ऊपर कुछ नहीं” – हरजोत सिंह बैस
धार्मिक सज़ा के ऐलान के बाद हरजोत सिंह बैस का पहला बयान सामने आया। उन्होंने कहा,
“मेरे लिए श्री अकाल तख्त साहिब से ऊपर कुछ नहीं है। यह मेरे लिए रब्बी हुकम है और मैं उसे पूरी श्रद्धा से स्वीकार करता हूं। यह मुझे छठे पातशाह का आदेश लगता है और मैं पूरे मन से इसका पालन करूंगा।”
