United States और Iran के बीच तनाव एक बार फिर तेज हो गया है। दोनों देशों के बीच पाकिस्तान में हुई शांति वार्ता असफल रही, जिसके बाद हालात और बिगड़ गए। एक-दूसरे पर आरोप और जवाबी कार्रवाई बढ़ने से मिडिल ईस्ट में युद्ध जैसे हालात बनते नजर आ रहे हैं। इसका असर दुनिया भर के बाजारों पर भी दिख रहा है—कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल आया है और शेयर बाजारों में गिरावट देखी जा रही है।
होर्मुज स्ट्रेट बना केंद्र
तनाव का सबसे बड़ा कारण Strait of Hormuz है, जो दुनिया के लिए बेहद महत्वपूर्ण तेल मार्ग है। अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति Donald Trump ने इस रूट पर नाकाबंदी का ऐलान किया है, जबकि ईरान ने भी तेल सप्लाई को लेकर कड़ी चेतावनी दी है। अगर यह मार्ग प्रभावित होता है, तो वैश्विक ऊर्जा सप्लाई पर बड़ा असर पड़ सकता है।
भारत की तैयारी: LPG सप्लाई पर फोकस
इन हालातों के बीच भारत सरकार पूरी तरह सतर्क है। LPG की कमी न हो, इसके लिए 5 किलोग्राम वाले छोटे सिलेंडरों की सप्लाई बढ़ा दी गई है। 23 मार्च से अब तक 13 लाख से ज्यादा ऐसे सिलेंडर बेचे जा चुके हैं। इनकी रोजाना बिक्री भी 1 लाख यूनिट से ऊपर पहुंच गई है। इससे खासतौर पर गरीब और प्रवासी मजदूरों को राहत मिल रही है।
PNG कनेक्शन में तेजी
सरकार पाइप्ड नेचुरल गैस (PNG) कनेक्शनों के विस्तार पर भी जोर दे रही है। मार्च से अब तक 4.24 लाख से ज्यादा नए PNG कनेक्शन दिए गए हैं। इसके चलते करीब 30,000 उपभोक्ताओं ने LPG छोड़कर PNG अपनाया है, जिससे गैस की मांग को संतुलित करने में मदद मिल रही है। भारत ने अपनी तैयारी मजबूत कर ली है, लेकिन वैश्विक हालात अभी भी अनिश्चित बने हुए हैं। अगर होर्मुज स्ट्रेट पर तनाव बढ़ता है और सप्लाई प्रभावित होती है, तो तेल और गैस का संकट गहरा सकता है। ऐसे में आने वाले दिनों में ऊर्जा बाजार और अंतरराष्ट्रीय स्थिति पर नजर बनी रहेगी।
