आम आदमी पार्टी (AAP) के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पेपर लीक मामलों में फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाने के ऐलान पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने आधी रात को घोषणा की कि सोमवार को संसद में फास्ट ट्रैक कोर्ट से जुड़ा कानून लाया जाएगा, लेकिन अगले ही दिन सामने आए घटनाक्रम ने इस आश्वासन पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
NEET-UG 2024 मामले का किया जिक्र
केजरीवाल ने अपने बयान में NEET-UG 2024 पेपर लीक मामले का उल्लेख करते हुए कहा कि जिस व्यक्ति को लंबे समय तक मामले का कथित मास्टरमाइंड बताया जाता रहा, उसे लेकर CBI ने अदालत में कहा कि उसके खिलाफ कोई ठोस साक्ष्य नहीं मिले। उन्होंने आरोप लगाया कि यदि जांच एजेंसियां इस तरह के निष्कर्ष पेश करेंगी, तो दोषियों को सजा दिलाने के दावों पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
सरकार की मंशा पर साधा निशाना
AAP प्रमुख ने कहा कि यदि जांच में पर्याप्त साक्ष्य ही पेश नहीं किए जाएंगे, तो फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाने का उद्देश्य क्या होगा। उन्होंने आरोप लगाया कि केवल नई घोषणाएं करने से युवाओं का भरोसा नहीं जीता जा सकता। उनके मुताबिक, छात्रों के भविष्य से जुड़े मामलों में निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई सबसे अधिक जरूरी है।
प्रधानमंत्री ने क्या किया था ऐलान
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में घोषणा की थी कि पेपर लीक के मामलों के त्वरित निपटारे और दोषियों को जल्द सजा दिलाने के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट स्थापित किए जाएंगे। उन्होंने कहा था कि युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने वालों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा और सरकार छात्रों के हितों की रक्षा के लिए लगातार कदम उठा रही है।
CBI का पक्ष भी आया सामने
इस बीच CBI ने स्पष्ट किया है कि उसकी जांच में संजीव कुमार उर्फ संजीव मुखिया के खिलाफ NEET-UG 2024 प्रश्नपत्र की चोरी या वितरण में शामिल होने का कोई साक्ष्य नहीं मिला। एजेंसी का कहना है कि जांच के दौरान उपलब्ध सबूतों के आधार पर ही कार्रवाई की गई है, जबकि मामले में अन्य आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की जा चुकी है।
