प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वतंत्रता दिवस संबोधन में ‘दिमागी नक्सल’ शब्द के इस्तेमाल को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। पीएम मोदी ने लाल किले से अपने भाषण में कहा था कि हथियार उठाने वाले नक्सलवाद के खिलाफ कार्रवाई हुई है, लेकिन देश को उन लोगों से भी सावधान रहना होगा जिन्हें उन्होंने ‘दिमागी नक्सल’ बताया। उन्होंने ऐसे लोगों को पहचानने और अलग-थलग करने की बात कही थी।
केजरीवाल ने खुद को बताया ‘दिमागी नक्सल’
आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने इस बयान पर प्रधानमंत्री मोदी पर निशाना साधा। केजरीवाल ने कहा कि वह देश के बच्चों के लिए बेहतर शिक्षा, जनता के स्वास्थ्य और देश के विकास की बात करते हैं। उनके मुताबिक, सरकार से सवाल उठाना और देश के मुद्दों पर आवाज उठाना देशभक्ति का हिस्सा है।
केजरीवाल ने तंज कसते हुए कहा कि अगर विकसित भारत का सपना देखना और देश के विकास की बात करना ‘दिमागी नक्सलवाद’ है, तो वह खुद को ‘दिमागी नक्सल’ कहे जाने पर गर्व करेंगे।
विपक्ष ने भी उठाए सवाल
प्रधानमंत्री के बयान पर कांग्रेस समेत कई विपक्षी नेताओं ने भी प्रतिक्रिया दी है। कांग्रेस ने आरोप लगाया कि ‘दिमागी नक्सल’ जैसे शब्दों का इस्तेमाल सरकार के आलोचकों और असहमति रखने वालों को निशाना बनाने के लिए किया जा रहा है। दूसरी ओर, केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने स्पष्ट किया कि प्रधानमंत्री ने अपने भाषण में विपक्षी नेताओं को ‘दिमागी नक्सल’ नहीं कहा था।
शिक्षा और स्वास्थ्य को लेकर केजरीवाल का संदेश
केजरीवाल ने अपने बयान में शिक्षा, स्वास्थ्य और विकास जैसे मुद्दों को केंद्र में रखा। उन्होंने कहा कि आम लोगों से जुड़े सवाल उठाना और सरकार से जवाब मांगना लोकतांत्रिक प्रक्रिया का हिस्सा है।
