अमेरिकी सीनेट ने रूस और ईरान से जुड़े प्रतिबंधों को लेकर एक महत्वपूर्ण विधेयक को 86-11 के बहुमत से मंजूरी दे दी है। इस विधेयक का उद्देश्य रूस से तेल और गैस खरीदने वाले प्रमुख देशों पर आर्थिक दबाव बढ़ाना बताया गया है। प्रस्तावित कानून के तहत अमेरिकी राष्ट्रपति को ऐसे देशों से आयात होने वाले सामान पर 100 प्रतिशत तक टैरिफ लगाने का अधिकार मिल सकता है। हालांकि, इस विधेयक के कानून बनने के लिए आगे की संवैधानिक प्रक्रिया पूरी होना अभी बाकी है।
किन देशों पर पड़ सकता है असर
विधेयक में रूस से तेल और गैस खरीदने वाले प्रमुख देशों का उल्लेख किया गया है। इनमें भारत, चीन, अजरबैजान, हंगरी और स्लोवाकिया शामिल हैं। इसके अलावा, 1996 के ईरान प्रतिबंध कानून की अवधि 2031 तक बढ़ाने का भी प्रावधान रखा गया है। इस कानून के तहत ईरान के ऊर्जा क्षेत्र में निवेश करने वाली कंपनियों पर कार्रवाई की जा सकती है।
अरविंद केजरीवाल ने केंद्र सरकार पर साधा निशाना
इस मुद्दे पर आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने केंद्र सरकार की विदेश नीति पर सवाल उठाए हैं। सोशल मीडिया पर जारी अपने बयान में उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार की नीतियों के कारण भारत को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर दबाव का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने दावा किया कि अमेरिका के फैसलों में भारत के हितों की अनदेखी हो रही है और केंद्र सरकार इस स्थिति का प्रभावी ढंग से जवाब देने में सफल नहीं रही है।
बिल को लेकर बढ़ी राजनीतिक बहस
अमेरिकी सीनेट में विधेयक पारित होने के बाद भारत में राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। विपक्षी दल इस मुद्दे पर केंद्र सरकार से जवाब मांग रहे हैं, जबकि सरकार की ओर से इस विधेयक और उसके संभावित प्रभावों पर आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार किया जा रहा है। यदि यह विधेयक आगे की प्रक्रिया पूरी कर कानून का रूप लेता है, तो भारत सहित कई देशों के अमेरिका के साथ व्यापारिक संबंधों पर इसका असर पड़ सकता है।
