उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले के प्रसिद्ध दयारा बुग्याल ट्रेक से लापता हुई बबीता पांडे का 12 दिन बाद भी कोई सुराग नहीं मिल पाया है। नैनीताल जिले के रामनगर की रहने वाली बबीता पांडे ट्रेकिंग के लिए अपने दो दोस्तों के साथ गई थीं, लेकिन 29 मई की रात गोई बेस कैंप से अचानक गायब हो गईं। इसके बाद से प्रशासन, पुलिस और बचाव दल लगातार उनकी तलाश में जुटे हुए हैं।
मोबाइल आधी रात तक था सक्रिय
जांच में सामने आया है कि बबीता का मोबाइल फोन लापता होने वाली रात देर तक सक्रिय था। इसी वजह से जांच एजेंसियां मोबाइल लोकेशन और डिजिटल गतिविधियों से जुड़े सुराग जुटाने की कोशिश कर रही हैं। अधिकारियों का मानना है कि मोबाइल डेटा मामले की गुत्थी सुलझाने में अहम भूमिका निभा सकता है।
बड़े स्तर पर चल रहा सर्च ऑपरेशन
बबीता की तलाश के लिए कई एजेंसियों को लगाया गया है। पुलिस, प्रशासन, ड्रोन टीम, खोजी कुत्तों और पर्वतीय बचाव दलों के अलावा अब नेहरू इंस्टीट्यूट ऑफ माउंटेनियरिंग (NIM) की विशेषज्ञ टीम भी अभियान में शामिल है। हेलीकॉप्टर से हवाई सर्वेक्षण भी किया जा चुका है, लेकिन अब तक कोई ठोस सफलता नहीं मिली है।
दोस्तों से भी की गई पूछताछ
बबीता के साथ ट्रेक पर गए दोनों दोस्तों से पुलिस लगातार पूछताछ कर रही है। परिवार की शिकायत के बाद जांच एजेंसियों ने उनके बयानों की भी जांच की है। बताया गया है कि दोनों ने दावा किया था कि बबीता रात के समय टेंट से बाहर गई थीं और उसके बाद वापस नहीं लौटीं।
सोशल मीडिया और आखिरी तस्वीरें जांच के दायरे में
जांच के दौरान बबीता के सोशल मीडिया अकाउंट्स की भी पड़ताल की जा रही है। उनके इंस्टाग्राम अकाउंट पर ट्रिप से जुड़ी कुछ तस्वीरें मिली हैं, जिन्हें जांच का हिस्सा बनाया गया है। परिवार द्वारा साझा की गई उनकी आखिरी तस्वीरें भी जांच एजेंसियों के पास हैं।
परिवार की बढ़ती चिंता
हर गुजरते दिन के साथ बबीता के परिवार की चिंता बढ़ती जा रही है। परिजन लगातार प्रशासन से खोज अभियान तेज करने की मांग कर रहे हैं। कठिन पहाड़ी इलाकों, मौसम की चुनौतियों और रहस्यमय परिस्थितियों के बीच यह मामला अब पूरे उत्तराखंड में चर्चा का विषय बन गया है।
