पंजाब विधानसभा में आज बाढ़ को लेकर हुई चर्चा का माहौल तब गरमा गया जब विपक्ष के नेता प्रताप सिंह बाजवा ने कैबिनेट मंत्री बरिंदर कुमार गोयल के इस्तीफे और प्रमुख सचिव कृष्ण कुमार के निलंबन की मांग की। बाजवा ने आरोप लगाया कि बाढ़ में हुई तबाही और प्रशासनिक चूक के लिए कुछ अधिकारी सीधे जिम्मेदार हैं।
बरिंदर गोयल का कड़ा जवाब
इस पर बरिंदर कुमार गोयल ने पलटवार करते हुए कहा कि मंत्रियों का चयन जनता द्वारा चुने गए मुख्यमंत्री द्वारा किया जाता है। उन्होंने आरोपों को सच्चाई से कोसों दूर बताया। गोयल ने बताया कि रणजीत सागर बांध से पानी इस तरह छोड़ा गया कि लोगों को न्यूनतम नुकसान पहुंचे। उन्होंने दस्तावेज पेश करते हुए कहा कि कांग्रेस सरकार के दौरान अवैध रूप से की गई डीस्ल्टिंग प्रक्रियाओं को वैध बना दिया गया था।
किसानों और भूमि विवाद पर बयान
गोयल ने यह भी कहा कि जिन लोगों ने किसानों की ज़मीनें सस्ते दामों पर खरीदीं, उनके प्रमाण पेश किए जाएंगे और वही बाढ़ के लिए जिम्मेदार हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रशासन ने हमेशा सावधानी बरती और किसी भी तरह का अनावश्यक नुकसान नहीं होने दिया।
विलवणीकरण और पर्यावरणीय पहलू
बरिंदर गोयल ने रावी और ब्यास नदियों में विलवणीकरण को लेकर स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने कहा कि रावी नदी पर 5 किलोमीटर के भीतर विलवणीकरण या खनन पर रोक है। ब्यास नदी में पक्षी अभयारण्य होने के कारण भी विलवणीकरण नहीं किया जा सकता। गोयल ने कहा कि अगर प्रशासन ने कुछ भी किया होता, तो विपक्ष उच्च न्यायालय में शिकायत करता।
विपक्षी अपील पर प्रतिक्रिया
बाजवा द्वारा प्रवासियों और अन्य दानदाताओं से ‘रंगला पंजाब’ के लिए पैसे न देने की अपील पर गोयल ने कहा कि अगर लोगों को मदद की जरूरत है, तो विपक्ष उन्हें कह रहा है कि पैसे देने की आवश्यकता नहीं है। उन्होंने अपील की कि इस संवेदनशील समय में राजनीति न की जाए और सभी मिलकर प्रभावितों की मदद पर ध्यान दें।
