पंजाब विधानसभा के सत्र में विपक्षी दल के नेता प्रताप बाजवा द्वारा अधिकारियों बरिंदर कुमार गोयल और कृष्ण कुमार को निलंबित करने की मांग ने सत्र में बड़ी हलचल मचा दी। विपक्ष ने दावा किया कि इन अधिकारियों की लापरवाही के कारण बाढ़ जैसी त्रासदी का सामना करना पड़ा।
वित्त मंत्री की तीखी प्रतिक्रिया
इस पर वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने जवाब देते हुए कहा कि पंजाब में जो सबसे बड़ी त्रासदी आई है, उसके बावजूद कांग्रेस पार्टी गंभीर नहीं है। उन्होंने कहा, “यह लोग मौतों पर भी राजनीति कर रहे हैं। क्या विपक्ष यह बता सकता है कि हिमाचल, जम्मू या उत्तराखंड में बारिश नहीं हुई? फिर क्यों झूठ बोलकर पंजाब के लोगों को भ्रमित किया जा रहा है?”
चीमा ने आगे कहा कि विपक्ष केवल बहाना बनाकर वॉकआउट कर रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि पंजाब के लोग देश के हिस्से हैं और हमेशा ही विपक्ष ने नकारात्मक मुद्दे को प्रमुखता दी है। उन्होंने कहा, “हम विपक्ष की हर बात का जवाब देंगे और उन्हें नहीं छोड़ेंगे।”
विपक्ष का आरोप
वहीं, प्रताप बाजवा ने कहा कि सरकार भाखड़ा और पॉंग डैम की जिम्मेदारी तो मांग रही है, लेकिन रणजीत सागर डैम को संभालने में असफल रही। उन्होंने तर्क दिया कि तीन अधिकारियों को पहले ही निलंबित किया जा चुका है, लेकिन बरिंदर कुमार गोयल और कृष्ण कुमार को भी निलंबित करना जरूरी है।
विधानसभा में पैदा हुई माहौल
प्रताप बाजवा के बयान के बाद विधानसभा में हंगामा शुरू हो गया। सदन में विपक्ष और सरकार के बीच जोरदार बहस हुई। विपक्ष ने आरोप लगाया कि प्रशासनिक लापरवाही और उचित कदम न उठाने के कारण बाढ़ में लोगों को भारी नुकसान हुआ।
वित्त मंत्री हरपाल चीमा ने इस पर कहा कि सरकार ने समय रहते राहत और बचाव कार्य शुरू किए, और विपक्ष केवल इस त्रासदी का राजनीतिक लाभ उठाने की कोशिश कर रहा है।
सत्र के दौरान यह स्पष्ट हो गया कि बाढ़ के मुद्दे पर विधानसभा में विपक्ष और सरकार के बीच टकराव बढ़ रहा है। जहां विपक्ष अधिकारी निलंबन और जिम्मेदारी तय करने की मांग कर रहा है, वहीं सरकार विपक्ष की आलोचना को राजनीति मानकर जवाब दे रही है।
