पंजाब विधानसभा के विशेष सत्र का आज आखिरी दिन था। सदन में मुख्यमंत्री भगवंत मान की सरकार ने धार्मिक ग्रंथों की बेअदबी से जुड़ा एक अहम बिल पेश किया, जिस पर सदन में लंबी बहस हुई। इस बिल के तहत अगर कोई श्री गुरु ग्रंथ साहिब, भगवत गीता, कुरान शरीफ या बाइबिल जैसे पवित्र ग्रंथों की बेअदबी करता है, तो उसे कम से कम 10 साल से लेकर उम्रकैद तक की सजा हो सकती है।
बिल पर चर्चा के दौरान ‘आप’ विधायक बुद्ध राम ने कहा कि मुख्यमंत्री भगवंत मान ने यह बिल लाकर अपने वादे को पूरा किया है। उन्होंने कहा कि हम सभी पंजाबियों को इस बात पर गर्व है कि हम सिख हैं और सिख वही होता है जिसे गुरु ग्रंथ साहिब ने गढ़ा है, फिर चाहे उसका जन्म किसी भी जाति या परिवार में हुआ हो।
बुद्ध राम ने कहा कि सिर्फ पंजाब में ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया में गुरु ग्रंथ साहिब के प्रति लोगों की आस्था और सम्मान देखने को मिलती है। यह बिल उन दर्दनाक घटनाओं की पृष्ठभूमि में लाया गया है जब धार्मिक ग्रंथों की बेअदबी हुई थी। उन्होंने इशारों-इशारों में पिछली सरकारों को जिम्मेदार ठहराते हुए कहा कि जिनके कार्यकाल में ये घटनाएं हुईं, उन्हें जनता ने भी सबक सिखाया और गुरुओं का न्याय भी मिला।
इस बिल की बहस की शुरुआत एक अरदास (प्रार्थना) से की गई और बहस के लिए 2 घंटे का समय तय किया गया। अलग-अलग दलों को समय इस प्रकार दिया गया: आम आदमी पार्टी को 1 घंटा 35 मिनट, कांग्रेस को 16 मिनट, अकाली दल को 3 मिनट, बीजेपी और बसपा को 2-2 मिनट, और निर्दलीय विधायकों को भी 2 मिनट का समय मिला।
गौरतलब है कि आम आदमी पार्टी के पास पंजाब विधानसभा में 117 में से 93 सीटें हैं। ऐसे में इस बिल का पास होना लगभग तय है। हालांकि, यह बिल कानून तभी बनेगा जब राज्यपाल की मंजूरी के बाद इसे राष्ट्रपति की स्वीकृति भी मिल जाएगी।
यह बिल धार्मिक भावनाओं की रक्षा के लिए एक मजबूत कदम माना जा रहा है।
