पंजाब सरकार ने बुधवार (20 अगस्त) को एक बड़ा प्रशासनिक बदलाव करते हुए 22 आईएएस (IAS) और 8 पीसीएस (PCS) अधिकारियों के तबादले कर दिए। यह आदेश तत्काल प्रभाव से लागू कर दिए गए हैं। माना जा रहा है कि सरकार ने यह कदम प्रशासनिक कामकाज को और ज्यादा तेज़ और पारदर्शी बनाने के उद्देश्य से उठाया है।
तीन जिलों के डिप्टी कमिश्नर बदले
इस फेरबदल में तीन जिलों के डिप्टी कमिश्नरों की अदला-बदली की गई है। मंसा जिले की नई डिप्टी कमिश्नर नवजोत कौर होंगी, जबकि राहुल चाबा को संगरूर का डिप्टी कमिश्नर बनाया गया है। वहीं, राजेश धीमान को बठिंडा का नया डिप्टी कमिश्नर नियुक्त किया गया है।
प्रमुख अधिकारियों को नई जिम्मेदारियां
इसके अलावा भी कई अहम विभागों की जिम्मेदारी बदली गई है।
- मोहम्मद तैयब को सचिव, जेल विभाग बनाया गया है।
- गुरप्रीत सिंह खैरा अब न्याय विभाग के सचिव होंगे।
- परनीत शेरगिल को राज्य परिवहन आयुक्त की जिम्मेदारी दी गई है।
- जसप्रीत सिंह को विशेष सचिव, खाद्य प्रसंस्करण विभाग में भेजा गया है।
अन्य महत्वपूर्ण नियुक्तियां
सरकार ने कई और अधिकारियों को नई भूमिकाएं सौंपी हैं।
- कुलवंत सिंह को निदेशक, स्थानीय सरकार नियुक्त किया गया।
- शौकत अहमद पर्रे को विशेष सचिव, वित्त विभाग और साथ ही कार्यकारी अधिकारी, पंजाब वक्फ बोर्ड का कार्यभार दिया गया है।
- गौतम जैन को अतिरिक्त सचिव, कार्मिक बनाया गया।
- गुलप्रीत सिंह औलख को विशेष सचिव, राजस्व व पुनर्वास विभाग की जिम्मेदारी दी गई।
- आयुष गोयल को एसडीएम, टप्पा बनाया गया है।
- बिक्रमजीत सिंह शेरगिल को अमृतसर नगर निगम का नया कमिश्नर नियुक्त किया गया।
PCS अधिकारियों का तबादला
इस प्रशासनिक फेरबदल में केवल आईएएस ही नहीं बल्कि 8 पीसीएस अधिकारियों का भी तबादला किया गया है। इनमें इशा सिंगल, सिमरप्रीत, गीतिका सिंह, जीवन जोत कौर और शिवराज सिंह बल जैसे अधिकारी शामिल हैं। इन सभी को राज्य के अलग-अलग जिलों और विभागों में नई जिम्मेदारियां दी गई हैं।
प्रशासन को मिलेगा नया तेज़ी और पारदर्शिता का रूप
विशेषज्ञों का मानना है कि यह बड़ा फेरबदल पंजाब सरकार की उस रणनीति का हिस्सा है, जिसके तहत प्रशासन को अधिक चुस्त-दुरुस्त और जवाबदेह बनाने पर जोर दिया जा रहा है। नए डिप्टी कमिश्नरों और सचिव स्तर के अधिकारियों से उम्मीद है कि वे अपने-अपने विभागों में तेज़ी से काम करेंगे और लोगों की समस्याओं के समाधान में सक्रिय भूमिका निभाएंगे।
इस कदम से साफ है कि सरकार राज्य के प्रशासनिक ढांचे में नई ऊर्जा और ताज़गी लाना चाहती है, ताकि विकास कार्यों को तेज़ी से आगे बढ़ाया जा सके और जनता को बेहतर सुविधाएं मिल सकें।
