पंजाब में मातृ और नवजात स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के लिए शुरू की गई “मुख्यमंत्री सेहत योजना” अब सरकार की बड़ी उपलब्धियों में गिनी जा रही है। राज्य सरकार के अनुसार इस योजना के तहत अब तक 5300 से ज्यादा हाई-रिस्क डिलीवरी पूरी तरह मुफ्त करवाई जा चुकी हैं। इस पहल से गरीब और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को बड़ी राहत मिली है, वहीं मातृ मृत्यु दर और नवजात शिशुओं की जटिलताओं को कम करने में भी मदद मिली है।
मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान सरकार इस योजना को पंजाब के हेल्थ मॉडल का अहम हिस्सा बता रही है। स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक गर्भावस्था के दौरान जटिल परिस्थितियों से गुजर रही महिलाओं को सरकारी और सूचीबद्ध अस्पतालों में मुफ्त इलाज, जांच, ऑपरेशन और दवाइयों की सुविधा दी जा रही है। खास बात यह है कि पूरी प्रक्रिया कैशलेस रखी गई है ताकि गरीब परिवारों को इलाज के लिए कर्ज या निजी खर्च का बोझ न उठाना पड़े।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार योजना के तहत हाई-रिस्क प्रेग्नेंसी की पहचान के लिए विशेष स्क्रीनिंग अभियान चलाए गए। जिन महिलाओं में ब्लड प्रेशर, एनीमिया, डायबिटीज, समय से पहले डिलीवरी या अन्य मेडिकल जटिलताओं का खतरा पाया गया, उन्हें तुरंत विशेष निगरानी में रखा गया। स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि समय पर पहचान और इलाज के कारण हजारों महिलाओं और नवजात बच्चों की जान बचाई जा सकी।
राज्य सरकार के मुताबिक योजना के तहत अब तक 5300 से ज़्यादा हाई-रिस्क डिलीवरी मुफ्त करवाई गईं। हजारों गर्भवती महिलाओं की विशेष मेडिकल स्क्रीनिंग की गई। जिला अस्पतालों और सरकारी मेडिकल कॉलेजों में हाई-रिस्क वार्ड बनाए गए। नवजात शिशुओं के लिए एनआईसीयू और विशेष देखभाल इकाइयों को मजबूत किया गया। ग्रामीण क्षेत्रों में आशा वर्कर और हेल्थ टीमों को विशेष ट्रेनिंग दी गई।
पंजाब में पहले गरीब परिवार हाई-रिस्क प्रेग्नेंसी के इलाज के लिए निजी अस्पतालों में लाखों रुपये खर्च करने को मजबूर होते थे। लेकिन अब सरकारी अस्पतालों में आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध होने से पंजाब के लोगों को राहत मिल है।
सरकार का कहना है कि योजना का सबसे बड़ा असर ग्रामीण और सीमावर्ती इलाकों में देखने को मिला है। यहां पहले विशेषज्ञ डॉक्टरों और आधुनिक स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी बड़ी समस्या थी। अब सरकारी अस्पतालों में गायनेकोलॉजिस्ट, एनेस्थेटिस्ट और बच्चों के डॉक्टरों की उपलब्धता बढ़ाने का दावा किया जा रहा है।
पंजाब मॉडल की चर्चा इसलिए भी हो रही है क्योंकि राज्य सरकार ने मातृ स्वास्थ्य और नवजात देखभाल को सीधे गरीब परिवारों के सामाजिक सुरक्षा से जोड़ा है। स्वास्थ्य मंत्री और विभागीय अधिकारियों का कहना है कि उद्देश्य सिर्फ डिलीवरी करवाना नहीं, बल्कि मां और बच्चे दोनों को सुरक्षित रखना है।
फिलहाल “मुख्यमंत्री सेहत योजना” पंजाब सरकार के लिए एक ऐसा हेल्थ नैरेटिव बनती दिखाई दे रही है, जिसमें मुफ्त इलाज, गरीब परिवारों को राहत और मातृ-शिशु सुरक्षा को बड़ी उपलब्धि के तौर पर देखा जा रहा है ।
