पंजाब में पराली जलाने की समस्या को नियंत्रित करने के लिए चलाए जा रहे अभियान के सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं। राज्य सरकार के अनुसार, वर्ष 2022 में जहां पराली जलाने के 49,922 मामले दर्ज किए गए थे, वहीं वर्ष 2025 में यह संख्या घटकर केवल 5,114 रह गई है। आंकड़ों के मुताबिक, यह करीब 89.75 प्रतिशत की उल्लेखनीय कमी है।
किसानों के सहयोग से मिली सफलता
सरकार का कहना है कि इस उपलब्धि के पीछे किसानों का सहयोग सबसे महत्वपूर्ण रहा है। बड़ी संख्या में किसानों ने पराली को आग लगाने के बजाय वैकल्पिक प्रबंधन तकनीकों को अपनाया। इससे न केवल पर्यावरण को लाभ मिला, बल्कि खेतों की उर्वरता बनाए रखने में भी मदद मिली।
जागरूकता अभियान और मशीनरी का असर
पराली प्रबंधन को सफल बनाने के लिए सरकार ने लगातार जागरूकता अभियान चलाए। इसके साथ ही किसानों को पराली प्रबंधन से जुड़ी आधुनिक मशीनरी और तकनीकी सहायता भी उपलब्ध कराई गई। सरकार की विभिन्न योजनाओं और नीतियों ने किसानों को पराली न जलाने के लिए प्रेरित किया।
पराली न जलाने वाले गांवों को मिलेगा सम्मान
राज्य सरकार ने घोषणा की है कि जिन गांवों ने पराली जलाने से पूरी तरह परहेज किया है, उन्हें नकद पुरस्कार देकर सम्मानित किया जाएगा। यह सम्मान उन किसानों और ग्राम पंचायतों को प्रोत्साहित करने के लिए दिया जाएगा जिन्होंने स्वच्छ वातावरण और पर्यावरण संरक्षण में योगदान दिया है।
पंजाब बना उदाहरण
पराली प्रबंधन के क्षेत्र में पंजाब की यह उपलब्धि अन्य राज्यों के लिए भी एक उदाहरण मानी जा रही है। सरकार का दावा है कि किसानों की भागीदारी, प्रभावी नीतियों और तकनीकी सहायता के कारण राज्य पराली प्रबंधन का एक सफल मॉडल बनकर उभरा है।
