12 जून को अहमदाबाद में एयर इंडिया के ड्रीमलाइनर विमान VT-ANB के दुर्घटनाग्रस्त होने की घटना अब नई दिशा ले रही है। इस मामले में Aircraft Accident Investigation Bureau (AAIB) की शुरुआती रिपोर्ट सामने आई है, जिसमें एक चौंकाने वाली जानकारी सामने आई है। रिपोर्ट के मुताबिक, एयर इंडिया ने इस विमान का एक अहम हिस्सा – Throttle Control Module (TCM) – पिछले छह सालों में दो बार बदला था। पहली बार यह 2019 में और दूसरी बार 2023 में बदला गया।
क्या होता है Throttle Control Module (TCM)?
TCM विमान का एक बेहद जरूरी फ्लाइट सिस्टम होता है। इसमें फ्यूल कंट्रोल स्विच शामिल होते हैं, जो विमान के इंजन को ईंधन की आपूर्ति नियंत्रित करते हैं। यह वही स्विच है जो इस हादसे की जांच में अब सबसे अहम कड़ी बन गया है। दरअसल, 12 जून को उड़ान भरने के थोड़ी देर बाद ही इस स्विच ने काम करना बंद कर दिया था, जिससे विमान की कार्यप्रणाली प्रभावित हुई और हादसा हुआ।
बोइंग के कहने पर हुआ था पुर्जे में बदलाव
सूत्रों के अनुसार, TCM को बदलने का निर्णय बोइंग की ओर से 2019 में जारी एक तकनीकी निर्देश के आधार पर लिया गया था। एयर इंडिया ने इस निर्देश का पालन करते हुए अपने ड्रीमलाइनर VT-ANB में TCM को 2019 और फिर 2023 में बदला। हालांकि, अभी तक यह स्पष्ट नहीं है कि जो नया TCM लगाया गया था, उसमें कोई तकनीकी खामी थी या नहीं।
AAIB की शुरुआती रिपोर्ट क्या कहती है?
जांच एजेंसी AAIB ने अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट में इस बात की पुष्टि की है कि TCM को दो बार बदला गया था। हालांकि, रिपोर्ट में यह भी साफ किया गया है कि अब तक की जांच में TCM का फ्यूल कंट्रोल स्विच से कोई सीधा संबंध सामने नहीं आया है। लेकिन यह भी स्वीकार किया गया है कि हादसे के समय स्विच का अचानक बंद हो जाना, एक गंभीर तकनीकी सवाल खड़ा करता है, जिसे जांच में गहराई से देखा जा रहा है।
जांच को लेकर उठे सवाल
इस हादसे की जांच पर एयरलाइन पायलट्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (ALPAI) ने भी सवाल खड़े किए हैं। ALPAI ने आरोप लगाया है कि जांच की दिशा शुरुआत से ही पायलट की गलती की ओर इशारा कर रही है, जो जांच को एकतरफा और पक्षपातपूर्ण बना सकती है।
ALPAI का कहना है कि किसी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले सभी तकनीकी पहलुओं की निष्पक्ष और वैज्ञानिक तरीके से जांच होनी चाहिए। संगठन ने मांग की है कि हादसे के असली कारणों को खोजने के लिए सभी तकनीकी रिकॉर्ड, उपकरण और रिपोर्ट की गहन समीक्षा की जाए।
यह मामला अब सिर्फ एक हादसे की जांच नहीं रह गया है, बल्कि इसमें तकनीकी विश्वसनीयता, पायलट की भूमिका और जांच की निष्पक्षता जैसे कई गंभीर सवाल उठ खड़े हुए हैं। आने वाले समय में AAIB की विस्तृत रिपोर्ट से इस हादसे की असली वजह सामने आने की उम्मीद है।
