पंजाब में युवाओं को नशे के जाल से बाहर निकालने के लिए भगवंत मान सरकार लगातार सक्रिय है। सरकार का स्पष्ट कहना है कि नशा पंजाब को बर्बाद कर रहा है और इसे जड़ से खत्म करना ही उनका लक्ष्य है। इसी दिशा में सरकार ने कई मजबूत कदम उठाए हैं और अब जेलों के भीतर भी सफाई अभियान शुरू हो गया है।
नशे के खिलाफ सख्त रवैया
आम आदमी पार्टी की सरकार का मानना है कि नशे के खिलाफ सिर्फ कानून ही नहीं, जागरूकता भी जरूरी है। इसलिए राज्य में लोगों को नशे के दुष्प्रभावों के बारे में जानकारी देने के लिए विशेष अभियान चलाया जा रहा है। युवाओं को रिहैब सेंटर में इलाज और परामर्श की सुविधा दी जा रही है ताकि वे दोबारा सामान्य जीवन की ओर लौट सकें।
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जेलों में भ्रष्टाचार पर कड़ी कार्रवाई
सरकार को जानकारी मिली थी कि पंजाब की कुछ जेलों के अंदर भी नशे का नेटवर्क सक्रिय है और वहां भ्रष्टाचार के चलते नशा आसानी से पहुंच रहा है। इस पर सख्त कदम उठाते हुए 25 जेल अधिकारियों और कर्मचारियों को सस्पेंड कर दिया गया है।
इनमें 3 डिप्टी सुपरिटेंडेंट, 2 असिस्टेंट सुपरिटेंडेंट और कई अन्य कर्मचारी शामिल हैं। सरकार का कहना है कि कोई भी अधिकारी या कर्मचारी अगर नशे के कारोबार में लिप्त पाया गया तो उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी, चाहे वह किसी भी पद पर क्यों न हो।
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जेल सुधार की नई पहल
भ्रष्टाचार और नशे की सप्लाई पर रोक लगाने के लिए जेलों में निगरानी और प्रबंधन को और मजबूत किया जा रहा है। जेल प्रशासन की जवाबदेही तय की जा रही है और नई तकनीक की मदद से कैदियों की गतिविधियों पर नजर रखी जा रही है।
सरकार का कहना है कि जेल सुधार के बिना नशा मुक्त पंजाब का सपना अधूरा है। इसलिए अब जेल के भीतर भी पूरी सतर्कता बरती जा रही है।
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मुख्यमंत्री का संदेश
मुख्यमंत्री भगवंत मान ने साफ कहा है कि उनकी सरकार नशे के खिलाफ “जीरो टॉलरेंस” की नीति पर काम कर रही है। उन्होंने जनता से अपील की कि वे नशे के खिलाफ इस लड़ाई में सरकार का साथ दें और अपने आस-पास नशा बेचने या इस्तेमाल करने वालों की जानकारी तुरंत संबंधित विभाग को दें।
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पंजाब सरकार की यह सख्त और ठोस कार्रवाई बताती है कि अब नशे और भ्रष्टाचार के खिलाफ कोई समझौता नहीं होगा। जेल से लेकर गाँव तक, हर स्तर पर यह लड़ाई जारी है — ताकि आने वाली पीढ़ी को एक सुरक्षित, स्वस्थ और नशा मुक्त पंजाब मिल सके।
