भारतीय शेयर बाजार में शुक्रवार 29 मई को जबरदस्त उतार-चढ़ाव देखने को मिला। सुबह बाजार ने शानदार शुरुआत की और निवेशकों में उत्साह का माहौल बन गया, लेकिन दोपहर तक तस्वीर पूरी तरह बदल गई। शुरुआती बढ़त के बाद भारी बिकवाली शुरू हुई, जिससे प्रमुख सूचकांक Sensex और Nifty दोनों लाल निशान में बंद हुए।
सुबह दिखी थी मजबूत तेजी
कारोबार की शुरुआत में बाजार सकारात्मक संकेतों के साथ खुला। BSE Sensex अपने पिछले बंद स्तर से करीब 352 अंक ऊपर चढ़कर 76,220.02 के उच्च स्तर तक पहुंच गया। वहीं NSE Nifty भी तेजी के साथ खुला और शुरुआती कारोबार में 24,002.80 के स्तर तक पहुंच गया।
बाजार को कई सकारात्मक कारकों का समर्थन मिल रहा था। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भू-राजनीतिक तनाव कम होने की उम्मीदें, कच्चे तेल की कीमतों में नरमी, वैश्विक बाजारों में मजबूती और रुपये की बेहतर स्थिति ने निवेशकों का भरोसा बढ़ाया।
दोपहर में बदला बाजार का मूड
दोपहर के कारोबार में अचानक मुनाफावसूली का दबाव बढ़ने लगा। जिन निवेशकों ने हाल की तेजी में अच्छा लाभ कमाया था, उन्होंने अपने शेयर बेचने शुरू कर दिए। इसके चलते बाजार में बिकवाली तेज हो गई और प्रमुख सूचकांकों ने अपनी पूरी बढ़त गंवा दी।
Sensex दिन के उच्च स्तर से फिसलकर 1,092.05 अंक या 1.44 प्रतिशत की गिरावट के साथ 74,775.74 पर बंद हुआ। यह गिरावट निवेशकों के लिए बड़ा झटका साबित हुई क्योंकि सुबह तक बाजार मजबूती के संकेत दे रहा था।
Nifty भी नहीं बच पाया
Sensex की तरह Nifty में भी भारी कमजोरी देखने को मिली। शुरुआती तेजी के बाद Nifty लगातार दबाव में रहा और अंत में 359.40 अंक या 1.50 प्रतिशत की गिरावट के साथ 23,547.75 के स्तर पर बंद हुआ।
बाजार की व्यापक कमजोरी का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि Sensex के 30 शेयरों में से केवल 4 शेयर बढ़त में रहे, जबकि 26 शेयरों में गिरावट दर्ज की गई।
पश्चिम एशिया की खबरों पर टिकी नजर
बाजार पर अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों का भी असर दिखाई दिया। खबरें सामने आईं कि अमेरिका और ईरान के बीच 60 दिनों के संघर्ष-विराम समझौते को अंतिम रूप दिया जा सकता है। हालांकि इस समझौते को लेकर अभी भी स्थिति पूरी तरह स्पष्ट नहीं है।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की मंजूरी का इंतजार बताया जा रहा है, जबकि ईरान के सरकारी मीडिया ने कहा है कि अभी तक कोई अंतिम समझौता नहीं हुआ है। इस विरोधाभासी जानकारी के कारण निवेशकों के बीच अनिश्चितता बनी हुई है।
कच्चे तेल और महंगाई पर नजर
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अमेरिका और ईरान के बीच समझौता नहीं होता है तो पश्चिम एशिया में तनाव फिर बढ़ सकता है। इसका सीधा असर कच्चे तेल की कीमतों पर पड़ सकता है। तेल महंगा होने से वैश्विक व्यापार, परिवहन लागत और महंगाई पर दबाव बढ़ सकता है।
