बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के पहले चरण का मतदान गुरुवार (6 नवंबर) को शांतिपूर्ण माहौल में पूरा हो गया। पहले चरण में 18 जिलों की 121 सीटों पर वोट डाले गए। कुल 1314 उम्मीदवार मैदान में थे। इस चरण में रिकॉर्ड तोड़ मतदान दर्ज किया गया है, जिसने पुराने सभी रिकॉर्ड पीछे छोड़ दिए।
महिलाओं ने दिखाई बड़ी भागीदारी
राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी विनोद गुंज्याल ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि मतदान पूरी तरह सफल और शांतिपूर्ण रहा। उन्होंने कहा कि इस बार महिला मतदाताओं की भागीदारी बेहद उत्साहजनक रही।
चुनाव आयोग के अनुसार, इस चरण में कुल 64.66% मतदान हुआ, जो बिहार के पिछले सभी विधानसभा और लोकसभा चुनावों का रिकॉर्ड तोड़ने वाला आंकड़ा है।
तकनीकी गड़बड़ियाँ और त्वरित समाधान
मतदान के दौरान कुछ ईवीएम मशीनों में तकनीकी दिक्कतें आईं, लेकिन आयोग की टीम ने तुरंत कार्रवाई की। कुल 165 बैलेट यूनिट, 169 कंट्रोल यूनिट, और 480 वीवीपैट मशीनें बदली गईं। अधिकारियों ने बताया कि किसी भी जगह मतदान पूरी तरह से नहीं रुका, हर बूथ पर विकल्प तैयार रखा गया था।
1415 लोग हिरासत में, कुछ जगह बहिष्कार
हालांकि कुछ इलाकों से मतदान बहिष्कार की खबरें भी आईं। बक्सर, फतुहा और लखीसराय जैसे क्षेत्रों में कुछ बूथों पर लोगों ने वोट न डालने का फैसला किया।
एडीजी मुख्यालय कुंदन कृष्णन ने बताया कि चुनाव के दौरान सुरक्षा व्यवस्था कड़ी थी और 1415 लोगों को हिरासत में लिया गया। वहीं चुनाव आयोग को कुल 143 शिकायतें मिलीं, जिनका निपटारा समय रहते कर दिया गया।
इन 18 जिलों में हुई वोटिंग
मधेपुरा, सहरसा, दरभंगा, मुजफ्फरपुर, गोपालगंज, सीवान, सारण, वैशाली, समस्तीपुर, बेगूसराय, खगड़िया, मुंगेर, लखीसराय, शेखपुरा, नालंदा, पटना, भोजपुर और बक्सर में पहले चरण का मतदान संपन्न हुआ।
दांव पर कई दिग्गजों की किस्मत
पहले चरण में कई बड़े नेताओं की साख दांव पर लगी है। डिप्टी सीएम विजय कुमार सिन्हा और बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष सम्राट चौधरी समेत 16 मंत्रियों की किस्मत अब ईवीएम में बंद हो गई है।
पहले चरण में कुल 3 करोड़ 75 लाख से अधिक मतदाता थे — जिनमें लगभग 1.98 करोड़ पुरुष, 1.76 करोड़ महिलाएं, और 758 थर्ड जेंडर मतदाता शामिल रहे। मतदान के लिए 45,341 बूथ बनाए गए थे।
अगले चरण की तैयारी शुरू
पहले चरण की सफलता के बाद अब चुनाव आयोग ने दूसरे चरण की तैयारियों पर ध्यान केंद्रित कर दिया है। सुरक्षा व्यवस्था, मशीनों की जांच और कर्मियों की ट्रेनिंग का काम तेजी से जारी है।
बिहार में इस बार मतदाताओं का जोश और भागीदारी दोनों यह दिखाते हैं कि लोग परिवर्तन और स्थिरता के बीच अपनी नई दिशा तय करने के लिए पूरी तरह तैयार हैं।
