पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने केंद्र सरकार की कुछ नीतियों को लेकर कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने कहा कि मनरेगा योजना में किए जा रहे बदलाव आम लोगों के लिए नुकसानदेह साबित हो रहे हैं। मुख्यमंत्री के मुताबिक इन बदलावों से मेहनतकश लोगों को मिलने वाला रोजगार प्रभावित होगा और काम पाना पहले से ज्यादा मुश्किल हो जाएगा। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार अप्रत्यक्ष रूप से गरीबों के रोजगार पर रोक लगाने जैसा कदम उठा रही है।
विशेष विधानसभा सत्र बुलाने का फैसला
मुख्यमंत्री भगवंत मान ने बताया कि मनरेगा से जुड़े इन फैसलों के खिलाफ पंजाब सरकार आवाज उठाएगी। इसी मुद्दे पर चर्चा के लिए जनवरी के दूसरे हफ्ते में पंजाब विधानसभा का विशेष सत्र बुलाने का निर्णय लिया गया है। इस सत्र में केंद्र सरकार की नीतियों के असर और राज्य के हितों पर विस्तार से चर्चा की जाएगी।
अग्निवीर योजना पर भी चिंता जताई
मुख्यमंत्री ने केंद्र सरकार की अग्निवीर योजना को लेकर भी गंभीर सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि इस योजना के तहत 18 साल के युवाओं की भर्ती की जा रही है, जिन्हें एक साल की ट्रेनिंग के बाद 22 साल की उम्र में सेवा से मुक्त कर दिया जाएगा। मुख्यमंत्री के अनुसार अप्रैल 2026 में अग्निवीरों का पहला बैच सेवा पूरी कर पंजाब लौटेगा।
युवाओं के भविष्य को लेकर चिंता
भगवंत मान ने कहा कि वह इन युवाओं के भविष्य को लेकर काफी चिंतित हैं। उन्होंने बताया कि इन युवाओं को हथियारों की ट्रेनिंग दी जाती है और अगर उन्हें सही दिशा नहीं मिली तो गलत तत्व उनकी क्षमता का गलत इस्तेमाल कर सकते हैं। इससे समाज में नई चुनौतियां पैदा हो सकती हैं।
पंजाब पुलिस से जोड़ने पर विचार
मुख्यमंत्री ने संकेत दिए कि राज्य सरकार इन प्रशिक्षित युवाओं को रोजगार से जोड़ने के लिए विकल्प तलाश रही है। उन्होंने कहा कि अग्निवीरों को पंजाब पुलिस में शामिल करने को लेकर भी विचार किया जा रहा है, ताकि उनकी ट्रेनिंग का सही उपयोग हो सके और युवाओं को स्थायी और सुरक्षित भविष्य मिल सके।
केंद्र से पुनर्विचार की मांग
अंत में मुख्यमंत्री भगवंत मान ने केंद्र सरकार से मनरेगा और अग्निवीर जैसी योजनाओं पर दोबारा विचार करने की अपील की। उन्होंने कहा कि किसी भी योजना का उद्देश्य आम जनता और युवाओं के हित में होना चाहिए, न कि उनकी मुश्किलें बढ़ाने वाला।
