पवित्र गुरु ग्रंथ साहिब के 328 लापता स्वरूपों का मामला एक बार फिर चर्चा में है। इस गंभीर प्रकरण की जांच के लिए Special Investigation Team (SIT) का गठन किया गया है। धार्मिक और सामाजिक दृष्टि से संवेदनशील इस मामले में जांच को आगे बढ़ाने के लिए शीर्ष धार्मिक संस्था की ओर से स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं।
अकाल तख्त से सहयोग के निर्देश
अकाल तख्त के जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गड़गज ने शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (SGPC) को SIT के साथ जांच में पूरा सहयोग करने के आदेश दिए। यह निर्देश सोमवार, 12 जनवरी को SGPC अध्यक्ष हरजिंदर सिंह धामी को दिए गए थे। इसके बाद जांच प्रक्रिया में तेजी देखने को मिली।
एसजीपीसी दफ्तरों में पहुंची SIT
जत्थेदार के आदेशों के एक दिन बाद ही मंगलवार, 13 जनवरी को SIT के सदस्य अमृतसर स्थित SGPC मुख्य दफ्तर और चंडीगढ़ के उप-कार्यालय पहुंचे। जांच एजेंसी ने दोनों स्थानों पर पहुंचकर लापता स्वरूपों से जुड़े रिकॉर्ड और दस्तावेजों की मांग की। इससे यह संकेत मिला कि जांच अब सक्रिय चरण में प्रवेश कर चुकी है।
SIT सदस्यों का बयान
चंडीगढ़ में SIT सदस्य गुरबंस सिंह बैंस ने बताया कि पहले SGPC ने इस मामले में रिकॉर्ड देने से इनकार किया था। उनका कहना था कि अब अकाल तख्त के आदेशों के बाद जांच आगे बढ़ पाई है। SIT ने SGPC के चंडीगढ़ कार्यालय में एक लिखित पत्र सौंपा है, जिसमें आवश्यक रिकॉर्ड की सूची दी गई है। अमृतसर में भी SIT ने इसी तरह दस्तावेज मांगे हैं। SGPC कार्यालय की ओर से बताया गया कि इस विषय में अध्यक्ष से बातचीत की जाएगी।
2020 में सामने आया था मामला
लापता स्वरूपों का यह मामला पहली बार वर्ष 2020 में सामने आया था। इसके बाद लंबे समय तक यह विषय जांच और बहस का केंद्र बना रहा। दिसंबर 2025 में पंजाब सरकार ने इस मामले में 16 लोगों के खिलाफ FIR दर्ज की और SIT का गठन किया। अब तक इस केस में दो लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है।
SGPC का पहले का रुख
इससे पहले SGPC ने पुलिस जांच में सहयोग करने से इनकार किया था। संस्था का कहना था कि पंजाब सरकार उसके कार्यों में दखल दे रही है। हालांकि, अकाल तख्त के स्पष्ट निर्देशों के बाद अब सहयोग की प्रक्रिया शुरू होती दिखाई दे रही है।
