पंजाब के पटियाला से एक ऐसी प्रेरणादायक कहानी सामने आई है, जिसने दिखा दिया कि सही समय पर मिली मदद किसी की जिंदगी बदल सकती है। गुरपिंदर जीत सिंह नाम के एक व्यक्ति के लिए यह समय बेहद कठिन था, जब उनकी 65 वर्षीय मां गंभीर बीमारी से जूझ रही थीं। धीरे-धीरे उनकी तबीयत बिगड़ती जा रही थी और घर का माहौल चिंता से भर गया था।
जब सामने आई गंभीर बीमारी
शुरुआत में परिवार ने निजी डॉक्टरों और स्थानीय अस्पतालों में इलाज करवाया, लेकिन कोई खास सुधार नहीं हुआ। बाद में जांच में पता चला कि उनकी मां को कैंसर है। यह खबर सुनते ही परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। एक साधारण आय वाले परिवार के लिए यह बीमारी सिर्फ स्वास्थ्य संकट नहीं, बल्कि आर्थिक संकट भी बन गई।
इलाज का बढ़ता खर्च और चिंता
गुरपिंदर अपनी मां को बेहतर इलाज के लिए संगरूर के कैंसर अस्पताल लेकर गए। इलाज शुरू होते ही शुरुआती जांच और दवाइयों में करीब 60-65 हजार रुपये खर्च हो गए। एक ड्राइवर की कमाई के सामने यह रकम बहुत बड़ी थी। हर दिन उनके मन में यही सवाल आता था कि आखिर मां का इलाज कैसे पूरा होगा।
उम्मीद की किरण बनी सरकारी योजना
इसी मुश्किल समय में उन्हें “मुख्यमंत्री सेहत योजना” के बारे में पता चला। उन्होंने तुरंत इस योजना में रजिस्ट्रेशन करवाया और कुछ ही समय में उनका हेल्थ कार्ड बन गया। इसके बाद इलाज की पूरी जिम्मेदारी सरकार ने उठा ली। महंगे टेस्ट, दवाइयां, कीमोथेरेपी, ऑपरेशन और अस्पताल का खर्च—सब कुछ इस योजना के तहत कवर हो गया।
लंबा इलाज और डॉक्टरों की मेहनत
डॉक्टरों के अनुसार यह केस काफी चुनौतीपूर्ण था, क्योंकि कैंसर शरीर के अन्य हिस्सों तक फैल चुका था। इलाज के दौरान कई बार कीमोथेरेपी दी गई और बाद में करीब 8 घंटे लंबा ऑपरेशन किया गया। ऑपरेशन के बाद मरीज को कुछ समय आईसीयू और वेंटिलेटर पर भी रखा गया। धीरे-धीरे उनकी हालत में सुधार होने लगा और परिवार की उम्मीदें फिर से जाग उठीं।
लाखों का इलाज हुआ मुफ्त
इस पूरे इलाज पर लगभग 8 लाख रुपये से ज्यादा खर्च आया, लेकिन योजना के कारण परिवार को एक भी पैसा नहीं देना पड़ा। यह योजना गरीब और जरूरतमंद लोगों के लिए बड़ी राहत साबित हो रही है, जो महंगे इलाज का खर्च नहीं उठा सकते।
बेटे का जज्बा और मां की जीत
गुरपिंदर के लिए यह सिर्फ इलाज नहीं, बल्कि उनकी मां की जिंदगी की लड़ाई थी। उन्होंने हर मुश्किल में हिम्मत नहीं छोड़ी और मां के साथ हर पल खड़े रहे। आखिरकार इलाज सफल रहा और उनकी मां ने इस गंभीर बीमारी को मात दे दी।
समाज के लिए एक प्रेरणा
यह कहानी सिर्फ एक परिवार की नहीं, बल्कि उन लाखों लोगों के लिए उम्मीद है, जो आर्थिक तंगी के कारण इलाज नहीं करवा पाते। मुख्यमंत्री सेहत योजना ने यह साबित किया है कि सही समय पर मदद मिल जाए तो असंभव भी संभव हो सकता है।
