दिल्ली के जंतर-मंतर पर कई दिनों से चल रहा CJP का आंदोलन शनिवार को समाप्त हो गया। संगठन ने केंद्र सरकार के साथ हुई तीसरे दौर की बातचीत के बाद आंदोलन वापस लेने की घोषणा की। CJP नेताओं ने कहा कि सरकार की ओर से उनकी प्रमुख मांगों पर सकारात्मक सहमति मिलने के बाद यह फैसला लिया गया है। आंदोलनकारियों से शांतिपूर्ण ढंग से प्रदर्शन स्थल खाली करने और अपने घर लौटने की अपील भी की गई।
तीन प्रमुख मांगों पर हुई चर्चा
CJP के राष्ट्रीय प्रवक्ताओं ने बताया कि सरकार के साथ हुई बैठक में तीन मुख्य मांगों पर विस्तार से चर्चा हुई। इनमें केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा, प्रदर्शनकारियों और आयोजकों के खिलाफ दर्ज मामलों को वापस लेना तथा भविष्य में आंदोलन से जुड़े लोगों पर कोई नया मामला दर्ज नहीं करने की मांग शामिल थी। संगठन का कहना है कि इन मुद्दों पर सरकार ने सकारात्मक रुख अपनाया है।
एफआईआर वापस लेने का आश्वासन
CJP नेताओं ने बताया कि सरकार ने प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज एफआईआर की जानकारी साझा करने और उन्हें वापस लेने का भरोसा दिया है। संगठन के अनुसार, संबंधित दस्तावेज अगले कुछ दिनों में उपलब्ध कराए जाएंगे। इसके साथ ही सरकार ने यह भी आश्वासन दिया है कि आंदोलन में शामिल लोगों के खिलाफ भविष्य में किसी प्रकार की कानूनी कार्रवाई नहीं की जाएगी।
मुआवजे की मांग भी उठाई
बैठक के दौरान CJP ने उन परिवारों को आर्थिक सहायता देने की मांग भी रखी, जिन्होंने कथित परीक्षा विवाद से जुड़े घटनाक्रम के दौरान अपने परिजनों को खोया। संगठन ने कहा कि इस विषय पर भी सरकार के साथ चर्चा हुई और आगे की प्रक्रिया पर बातचीत जारी रहेगी।
सरकार ने दिया भरोसा
बैठक के बाद केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने कहा कि प्रतिनिधिमंडल के साथ विस्तृत चर्चा हुई है। उन्होंने बताया कि प्रदर्शनकारियों के खिलाफ किसी भी प्रकार की कार्रवाई नहीं करने और यदि कहीं मामले दर्ज हुए हैं तो उन्हें वापस लेने के मुद्दे पर सरकार सहमत है। साथ ही भविष्य में भी आंदोलन से जुड़े लोगों पर नए मामले दर्ज नहीं किए जाने का भरोसा दिया गया है। अब सरकार और CJP के बीच तय बिंदुओं पर आगे की प्रशासनिक प्रक्रिया शुरू होने की उम्मीद जताई जा रही है
