भारत में कुछ दिनों की सुस्ती के बाद मानसून एक बार फिर पूरी ताकत के साथ सक्रिय हो गया है। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार इस बार बादलों का एक लंबा सिस्टम भारत से लेकर चीन, कोरिया और जापान तक फैला हुआ है। इसी वजह से पूरे क्षेत्र में मौसम तेजी से बदला है और कई देशों में लगातार बारिश दर्ज की जा रही है। यह एक बड़े मौसमी चक्र का हिस्सा है, जिसमें समुद्र से आने वाली नमी और वायुमंडलीय हवाएं मिलकर बारिश को बढ़ावा देती हैं।
मानसून ने फिर पकड़ी रफ्तार
मौसम विभाग का कहना है कि मानसून की सक्रियता बढ़ने के साथ देश के कई राज्यों में भारी से बहुत भारी बारिश का दौर शुरू हो गया है। उत्तर भारत, पूर्वोत्तर, पश्चिमी तट और मध्य भारत के कई हिस्सों में तेज बारिश की संभावना जताई गई है। कुछ दिन पहले मानसून कमजोर पड़ गया था, लेकिन अब नई मौसमी प्रणाली बनने से बारिश का सिलसिला फिर तेज हो गया है।
बादलों का सफर कैसे बनता है बारिश की वजह
विशेषज्ञों के अनुसार मानसून केवल भारत तक सीमित नहीं रहता। हिंद महासागर और बंगाल की खाड़ी से उठने वाली नमी भरी हवाएं बादलों का विशाल समूह तैयार करती हैं। यही बादल आगे बढ़ते हुए पूर्वी एशिया तक पहुंच जाते हैं। रास्ते में अलग-अलग क्षेत्रों की हवाओं और तापमान के प्रभाव से कहीं हल्की तो कहीं मूसलाधार बारिश होती है। इसी कारण भारत और जापान जैसे दूर-दराज के देशों में भी एक ही समय पर बारिश की गतिविधियां देखने को मिल सकती हैं।
कई राज्यों में अलर्ट जारी
मानसून के दोबारा सक्रिय होने के बाद कई राज्यों के लिए भारी बारिश का अलर्ट जारी किया गया है। हिमालयी क्षेत्रों में भूस्खलन, अचानक बाढ़ और नदियों के जलस्तर बढ़ने की आशंका जताई गई है। वहीं मैदानी इलाकों में जलभराव और यातायात प्रभावित होने की संभावना है। मौसम विभाग लगातार हालात पर नजर बनाए हुए है और लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है।
खेती और जल संसाधनों के लिए राहत
मानसून की वापसी को किसानों के लिए राहत भरी खबर माना जा रहा है। जिन क्षेत्रों में बारिश की कमी थी, वहां खेतों को पर्याप्त नमी मिलने की उम्मीद है। इससे खरीफ फसलों की बुवाई और बढ़वार में मदद मिलेगी। साथ ही बांधों, नदियों और जलाशयों में पानी का स्तर भी बढ़ने की संभावना है, जिससे आने वाले महीनों में जल उपलब्धता बेहतर हो सकती है।
