पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने शहीद भगत सिंह को श्रद्धांजलि देते हुए एक भावुक और प्रेरणादायक संदेश दिया। उन्होंने कहा कि कुछ नेताओं ने अपने परिवारों के स्मारक बनवा लिए, लेकिन देश के महान सपूत भगत सिंह की शहादत को 95 साल बाद भी सही सम्मान नहीं मिला। अब उनकी याद में भव्य स्मारक बनाए जा रहे हैं, जो एक सराहनीय कदम है।
सिर्फ एक राज्य नहीं, पूरे देश के नायक
सीएम मान ने कहा कि भगत सिंह किसी एक परिवार या राज्य के नहीं, बल्कि पूरे देश के बेटे थे। उन्होंने देश की आज़ादी के लिए जो बलिदान दिया, वह हर भारतीय के लिए गर्व की बात है। दुर्भाग्य से पिछली सरकारों ने उन्हें सिर्फ एक समाज सेवक तक सीमित रखा, जबकि उनकी सोच और योगदान उससे कहीं बड़ा था।
युवा उम्र में अद्भुत देशभक्ति
भगत सिंह के जीवन को याद करते हुए उन्होंने बताया कि महज 18-19 साल की उम्र में ही उनके अंदर देशभक्ति का जज़्बा चरम पर था। और सिर्फ 23 साल की उम्र में उन्होंने हंसते-हंसते फांसी का फंदा स्वीकार कर लिया। इतनी कम उम्र में इतना बड़ा बलिदान इतिहास में बहुत कम देखने को मिलता है।
विचारों को जीवित रखने की अपील
सीएम मान ने भगत सिंह के प्रसिद्ध शब्दों को दोहराते हुए कहा— “मेरी मौत पर मत रोना, मेरी सोच को जिंदा रखना।” उन्होंने लोगों से अपील की कि हम सभी को भगत सिंह की जीवनी और विचारधारा को खुद भी पढ़ना चाहिए और अपने बच्चों को भी इससे जोड़ना चाहिए।
इंकलाब जिंदाबाद का संदेश
अंत में उन्होंने “इंकलाब जिंदाबाद” का नारा देते हुए कहा कि भगत सिंह की सोच आज भी प्रासंगिक है और हमें उनके रास्ते पर चलकर देश को आगे बढ़ाना चाहिए।
