पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने उत्तरी जोनल काउंसिल की 32वीं बैठक में पंजाब से जुड़े कई बड़े मुद्दों—चंडीगढ़, पंजाब यूनिवर्सिटी, नदियों के पानी के अधिकार और संघीय ढांचे—पर जोरदार तरीके से अपना पक्ष रखा। मुख्यमंत्री ने कहा कि संविधान ने स्पष्ट तौर पर राज्यों और केंद्र के अधिकार तय किए हैं, लेकिन पिछले कई दशकों में अधिकारों का केंद्रीकरण बढ़ता गया है। उन्होंने इसे संघवाद के मूल सिद्धांतों के खिलाफ बताया।
चंडीगढ़ पर फिर उठी पंजाब की मांग
CM मान ने चंडीगढ़ को पंजाब को सौंपने की पुरानी प्रतिबद्धता की याद दिलाई।
उन्होंने बताया कि:
- 1970 के इंदिरा गांधी समझौते में साफ लिखा था कि चंडीगढ़ पंजाब को मिलेगा।
- 1985 के राजीव-लोंगोवाल समझौते में भी इसकी पुष्टि की गई थी।
इसके बावजूद चंडीगढ़ पंजाब को नहीं सौंपा गया, जिससे पंजाबी समुदाय आहत है। उन्होंने कहा कि UT प्रशासन में पंजाब की हिस्सेदारी और अफ़सरों की नियुक्तियों में 60:40 का अनुपात फिर से लागू किया जाए।
नदियों के पानी पर पंजाब का हक – CM मान
बैठक में पानी विवाद सबसे बड़ा मुद्दा रहा। CM मान ने कहा कि सिंधु जल संधि के रद्द होने की स्थिति में यह समय है कि उत्तर भारत के राज्यों के बीच पानी के बंटवारे पर नई चर्चा शुरू हो।
उन्होंने जोर दिया कि:
- पंजाब के पास एसवाईएल नहर के लिए कोई अतिरिक्त पानी नहीं है।
- रावी–ब्यास नदियों में पानी की उपलब्धता लगातार घट रही है।
- पंजाब के 75% ब्लॉकों में भूजल स्तर खतरे की सीमा से नीचे चला गया है।
उन्होंने मांग की कि जब तक रावी–ब्यास ट्रिब्यूनल अंतिम फैसला नहीं देता, SYL से जुड़ी सभी गतिविधियाँ रोक दी जाएँ।
बी.बी.एम.बी. में राजस्थान की नियुक्ति का विरोध
मुख्यमंत्री ने भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड (BBMB) में राजस्थान से स्थायी सदस्य नियुक्त करने का कड़ा विरोध किया। उनका कहना है कि यह संस्था पंजाब पुनर्गठन अधिनियम के तहत बनी है और केवल पंजाब व हरियाणा से संबंधित है। पंजाब ने अपने सदस्यों की सूची पहले ही भेज दी है और पुराने नियम में बदलाव उचित नहीं है।
उन्होंने भाखड़ा और पौंग डैम के पूर्ण जल भंडारण स्तर (FRL) बढ़ाने का भी विरोध किया।
CM मान ने कहा कि—
- 1988, 2019, 2023 और 2025 की बाढ़ों ने साबित किया है कि FRL बढ़ाना खतरनाक होगा।
- FRL बढ़ा तो नीचे बसे पंजाब के इलाकों पर भारी खतरा बढ़ जाएगा।
यमुना जल बंटवारे पर Punjab का दावा
मुख्यमंत्री ने कहा कि यदि हरियाणा रावी–ब्यास का उत्तराधिकारी है, तो पंजाब को भी यमुना जल का अधिकार मिलना चाहिए। 1954 के समझौते और 1972 की रिपोर्ट में पंजाब को यमुना बेसिन का हिस्सा माना गया था।
