अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बगराम एयरबेस को अमेरिका के नियंत्रण में लेने की मांग को फिर से उठाया है। ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रूथ सोशल’ पर स्पष्ट रूप से चेतावनी दी कि अगर अफगानिस्तान बगराम एयरबेस को अमेरिका को वापस नहीं सौंपता है, तो इसके गंभीर परिणाम होंगे।
ट्रंप ने कहा, “हम इस समय अफगानिस्तान के साथ बातचीत कर रहे हैं। हमारा उद्देश्य है कि बगराम एयरबेस जल्द से जल्द हमारे नियंत्रण में आ जाए। अगर ऐसा नहीं होता है, तो आपको पता चलेगा कि मैं क्या करने जा रहा हूँ।” उन्होंने यह भी दावा किया कि बगराम एयरबेस चीन के परमाणु हथियार उत्पादन स्थल से मात्र एक घंटे की दूरी पर स्थित है और इसी कारण अमेरिका इसे महत्वपूर्ण मानता है।
हालांकि, अफगानिस्तान में सत्ता संभालने वाले तालिबान ने ट्रंप के इस दावे का कड़ा विरोध किया है। तालिबान ने स्पष्ट किया कि अफगानिस्तान में अमेरिकी सैनिकों की वापसी की अनुमति नहीं दी जाएगी और बगराम एयरबेस को अमेरिका को सौंपने का कोई सवाल ही नहीं उठता। इस सिलसिले में तालिबान के विदेश मंत्रालय के राजनीतिक निदेशक ज़ाकिर जलाली ने कहा कि अफगानिस्तान और अमेरिका के बीच संवाद होना चाहिए, लेकिन अमेरिकी फौज की वापसी पर सहमति नहीं दी जाएगी।
बगराम एयरबेस पिछले लगभग दो दशकों तक नाटो फौज का प्रमुख केंद्र रहा है। तालिबान के अफगानिस्तान पर कब्जा करने से कुछ समय पहले ही यह एयरबेस अफगान सशस्त्र बलों को सौंप दिया गया था। ट्रंप ने ब्रिटेन में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में दावा किया था कि अमेरिका ने इसे मुफ्त में छोड़ दिया।
2001 में न्यूयॉर्क और वॉशिंगटन पर अल-कायदा के हमलों के बाद शुरू हुई 20 साल लंबी अमेरिकी सेना की जंग के दौरान बगराम एयरबेस अफगानिस्तान में अमेरिकी फौज का सबसे बड़ा एयरबेस बन गया था। एयरबेस में अमेरिकी सैनिकों के लिए फास्ट-फूड रेस्टोरेंट, इलेक्ट्रॉनिक्स की दुकाने और यहां तक कि जेल परिसर भी मौजूद थे।
ट्रंप ने पहले भी संकेत दिए थे कि अमेरिका विभिन्न रणनीतिक जगहों पर कब्जा करना चाहता है, जिसमें बगराम एयरबेस को विशेष महत्व दिया गया। उन्होंने यह भी कहा कि इस एयरबेस के नियंत्रण को लेकर समझौता होना तालिबान के लिए बड़ा राजनीतिक मोड़ साबित हो सकता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि ट्रंप के इस दावे ने अफगानिस्तान और अमेरिका के बीच राजनीतिक तनाव को बढ़ा दिया है। हालांकि तालिबान ने स्पष्ट कर दिया है कि अमेरिकी फौज की वापसी की किसी भी शर्त पर अनुमति नहीं दी जाएगी। फिलहाल, बगराम एयरबेस के भविष्य को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कई सवाल उठ रहे हैं और इसे लेकर राजनीतिक चर्चाएं जारी हैं।
इस पूरे घटनाक्रम से यह स्पष्ट है कि अफगानिस्तान में सुरक्षा और रणनीतिक नियंत्रण का मुद्दा अभी भी संवेदनशील बना हुआ है और अमेरिका-तालिबान संबंधों में जटिलता बनी हुई है।
