चंडीगढ़ स्थित पंजाब यूनिवर्सिटी में जारी विरोध प्रदर्शनों के बीच छात्रों ने बड़ा कदम उठाते हुए आने वाली सभी परीक्षाओं का बहिष्कार करने का एलान कर दिया है। इस मुद्दे पर विस्तार से जानकारी देने के लिए छात्रों की ओर से एक प्रेस कॉन्फ्रेंस भी बुलाई गई है। उनका कहना है कि सैनट चुनावों की तारीख घोषित होने तक वे किसी भी यूनिवर्सिटी गतिविधि में हिस्सा नहीं लेंगे।
हाई कोर्ट की फटकार को भी नजरअंदाज
गौर करने वाली बात यह है कि छात्रों ने पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट की कड़ी टिप्पणी को भी नजरअंदाज कर दिया है। कोर्ट ने विश्वविद्यालय में पढ़ाई और परीक्षाओं को बाधित न करने की सलाह दी थी, लेकिन छात्रों ने साफ कर दिया है कि उनकी मांग पूरी होने तक उनका आंदोलन जारी रहेगा।
18 नवंबर से शुरू होनी हैं परीक्षाएं
यूनिवर्सिटी के विभिन्न विभागों की सेमेस्टर परीक्षा 18 नवंबर 2025 के आसपास शुरू होने वाली हैं। कई कोर्सेज की डेटशीट भी जारी हो चुकी है, लेकिन इस आंदोलन के चलते परीक्षाओं पर बड़ा असर पड़ सकता है।
जैसे ही यूनिवर्सिटी चुनावों की संभावित तारीखों की चर्चा शुरू हुई, कैंपस में विरोध प्रदर्शन तेज हो गए। अब अधिकांश विभागों की परीक्षाएं इस महीने के आखिर तक शुरू होनी हैं, लेकिन छात्र संगठनों के निर्णय से परीक्षाओं का आयोजन मुश्किल हो सकता है।
20 नवंबर को छात्र संगठन बुलाएंगे बैठक
विरोध में शामिल सभी प्रमुख छात्र संगठनों की एक बैठक 20 नवंबर को बुलाई गई है, जिसमें आगे की रणनीति तय की जाएगी। छात्र मानते हैं कि सैनट चुनावों की तारीखों की घोषणा ही मौजूदा तनाव को खत्म कर सकती है।
यूनिवर्सिटी प्रशासन की चिंता बढ़ी
परीक्षाओं के बहिष्कार के ऐलान ने प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है। विश्वविद्यालय प्रबंधन लगातार छात्रों से बातचीत की कोशिश कर रहा है, लेकिन अब तक कोई सहमति नहीं बन पाई है।
छात्रों के इस फैसले के बाद अब नजर प्रशासन और छात्र संगठनों के बीच होने वाली अगली बातचीत पर है। यदि संवाद नहीं होता, तो यूनिवर्सिटी का शैक्षणिक कैलेंडर गंभीर रूप से प्रभावित हो सकता है।
