अगर आप आने वाले दिनों में AC, फ्रिज, पंखा, गीजर या कोई दूसरा इलेक्ट्रिकल सामान खरीदने की योजना बना रहे हैं, तो तांबे की कीमत पर नजर रखना जरूरी है। तांबा इन उपकरणों में इस्तेमाल होने वाली महत्वपूर्ण धातुओं में शामिल है। इसकी कीमत लंबे समय तक ऊंची रहती है तो कंपनियों की उत्पादन लागत बढ़ सकती है और इसका कुछ असर तैयार सामान की कीमतों पर पड़ सकता है।
MCX पर अगस्त की शुरुआत में कॉपर का भाव करीब ₹1,340-1,370 प्रति किलो के दायरे में कारोबार करता दिखा। 4 अगस्त को यह करीब ₹1,363.50 प्रति किलो तक पहुंचा था।
बिजली से जुड़े सामान में तांबे की बड़ी भूमिका
तांबा बिजली का अच्छा सुचालक है। इसी वजह से इसका इस्तेमाल बिजली के तार, केबल, मोटर, ट्रांसफॉर्मर और कई इलेक्ट्रिकल उपकरणों में बड़े पैमाने पर होता है। AC और रेफ्रिजरेटर जैसे उपकरणों के अलावा इलेक्ट्रिक वाहनों और पावर इंफ्रास्ट्रक्चर में भी तांबे की जरूरत होती है।
यानी तांबे की कीमत में लगातार बढ़ोतरी सिर्फ कमोडिटी मार्केट की खबर नहीं है। इसका असर धीरे-धीरे इलेक्ट्रिकल और इलेक्ट्रॉनिक सामान बनाने वाली कंपनियों की लागत पर भी पड़ सकता है।
दुनिया में बढ़ रही तांबे की मांग
तांबे की मांग बढ़ने के पीछे इलेक्ट्रिक वाहन, सोलर और विंड एनर्जी जैसे सेक्टर बड़ी वजह हैं। इसके अलावा AI डेटा सेंटर के तेजी से विस्तार के कारण बिजली और नेटवर्क इंफ्रास्ट्रक्चर में भी तांबे की जरूरत बढ़ रही है। बाजार में सप्लाई को लेकर भी चिंता बनी हुई है, क्योंकि नई तांबे की खदान शुरू करने में कई साल लग सकते हैं।
भारत में भी तेजी से बढ़ रही जरूरत
भारत में बिजली, इंफ्रास्ट्रक्चर, निर्माण, रिन्यूएबल एनर्जी और इलेक्ट्रिक वाहनों का विस्तार हो रहा है। इन क्षेत्रों के बढ़ने के साथ तांबे की खपत भी बढ़ रही है। यही वजह है कि घरेलू बाजार में तांबे की कीमत और उपलब्धता पर उद्योग जगत की नजर बनी हुई है।
किन सामानों पर पड़ सकता है असर?
अगर तांबा लंबे समय तक महंगा बना रहता है, तो इसका असर कई उत्पादों की लागत पर पड़ सकता है। इनमें AC, रेफ्रिजरेटर, पंखे, गीजर, इलेक्ट्रिक मोटर, बिजली के तार-केबल, ट्रांसफॉर्मर और दूसरे इलेक्ट्रिकल उपकरण शामिल हैं।
हालांकि, किसी उत्पाद की अंतिम कीमत सिर्फ तांबे पर निर्भर नहीं करती। इसमें कच्चे माल की दूसरी लागत, ऊर्जा, परिवहन, टैक्स और कंपनी की कीमत नीति भी भूमिका निभाती है।
