आम आदमी पार्टी (AAP) के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने पेट्रोल की बढ़ती कीमतों को लेकर केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है। उनका कहना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल (क्रूड ऑयल) की कीमत लगभग 115 डॉलर प्रति बैरल से घटकर 70 डॉलर प्रति बैरल के आसपास आ चुकी है, लेकिन देश में पेट्रोल अभी भी करीब ₹102 प्रति लीटर बिक रहा है। उन्होंने दावा किया कि मौजूदा हालात में पेट्रोल की कीमत ₹82 प्रति लीटर या उससे भी कम होनी चाहिए।
2014 के बाद कई बार गिरे तेल के दाम
केजरीवाल ने कहा कि वर्ष 2014 के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में छह बार बड़ी गिरावट आई, लेकिन आम लोगों को इसका लाभ नहीं मिला। उनका आरोप है कि जब वैश्विक बाजार में तेल सस्ता होता है तो भारत में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में उसी अनुपात में कमी नहीं की जाती, जिससे जनता पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ता है।
तेल कंपनियों के मुनाफे का भी किया जिक्र
AAP प्रमुख ने दावा किया कि पिछले वर्ष सरकारी तेल कंपनियों को करीब ₹77 हजार करोड़ का मुनाफा हुआ। इसके बावजूद पेट्रोल की कीमतों में राहत नहीं दी गई। उन्होंने केंद्र सरकार से मांग की कि आम लोगों को ₹82 प्रति लीटर पर ‘प्योर पेट्रोल’ उपलब्ध कराया जाए और अंतरराष्ट्रीय बाजार में आई गिरावट का सीधा फायदा उपभोक्ताओं तक पहुंचाया जाए।
सरकार का क्या है पक्ष?
दूसरी ओर, केंद्र सरकार और पेट्रोलियम मंत्रालय का कहना है कि पेट्रोल की खुदरा कीमत केवल कच्चे तेल के मौजूदा भाव से तय नहीं होती। इसमें पहले खरीदे गए महंगे कच्चे तेल की लागत, रिफाइनिंग, परिवहन, कर और अन्य खर्च भी शामिल होते हैं। सरकार का कहना है कि पश्चिम एशिया संकट के दौरान उपभोक्ताओं को कीमतों के बड़े उतार-चढ़ाव से बचाने के लिए खुदरा दरों को स्थिर रखा गया था, इसलिए कीमतों में बदलाव चरणबद्ध तरीके से होता है।
