शिरोमणि अकाली दल के वरिष्ठ नेता और पूर्व कैबिनेट मंत्री बिक्रम सिंह मजीठिया को विजिलेंस ब्यूरो द्वारा 540 करोड़ रुपये की ड्रग मनी केस में गिरफ्तार करने के बाद अदालत ने 7 दिन की पुलिस रिमांड पर भेज दिया है। अब विजिलेंस को मजीठिया से गहन पूछताछ और केस से जुड़े तथ्यों की जांच के लिए पूरा सप्ताह मिलेगा। अगली पेशी 2 जुलाई को तय की गई है।
क्या है मामला?
बिक्रम मजीठिया पर आरोप है कि उन्होंने नशे के कारोबार से जुड़ी ड्रग मनी को बड़े पैमाने पर लांंडर किया। जांच में सामने आया है कि 540 करोड़ रुपये से अधिक की रकम अलग-अलग तरीकों से सफेद की गई।
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इसमें से 161 करोड़ रुपये सीधा मजीठिया से जुड़ी कंपनियों के खातों में पाए गए, जिनका कोई वैध स्रोत नहीं मिला।
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141 करोड़ रुपये विदेशी संस्थाओं के माध्यम से भेजे गए।
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236 करोड़ रुपये कंपनियों के खातों में बिना किसी दस्तावेजी पुष्टि के दर्ज हैं।
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इनके अलावा, मजीठिया और उनकी पत्नी गनीव कौर के नाम पर अचल संपत्तियों में असामान्य वृद्धि दर्ज की गई, जिसके लिए कोई वैध कमाई का स्रोत नहीं बताया गया।
कैसे दर्ज हुआ केस?
विजिलेंस ब्यूरो के प्रवक्ता के अनुसार, यह केस स्टेट क्राइम ब्रांच मोहाली में दर्ज FIR नंबर 2 के आधार पर आगे बढ़ाया गया। इस FIR में NDPS एक्ट की धारा 25, 27A और 29 के तहत केस दर्ज किया गया है।
विशेष जांच टीम (SIT) की रिपोर्ट में इस बात के स्पष्ट सबूत हैं कि बिक्रम मजीठिया ने सराया इंडस्ट्रीज़ जैसी कंपनियों के माध्यम से ड्रग मनी को सफेद करने में मदद की। SIT के मुताबिक, यह सारा नेटवर्क मजीठिया के राजनैतिक प्रभाव और पद का इस्तेमाल कर संचालित किया गया।
क्या बरामद हुआ?
जांच के दौरान 22 लोगों से पूछताछ हुई और तीन स्थानों पर छापेमारी की गई। इस दौरान:
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30 से अधिक मोबाइल फोन
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5 लैपटॉप
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3 आईपैड
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2 डेस्कटॉप
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कई डायरियाँ
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प्रॉपर्टी के दस्तावेज
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सराया इंडस्ट्रीज़ से जुड़े महत्त्वपूर्ण कागजात बरामद किए गए।
ये सभी दस्तावेज़ और डिजिटल डिवाइस अब जांच का अहम हिस्सा हैं, जिनसे मनी लॉन्ड्रिंग के तरीके और नेटवर्क का पूरा खुलासा हो सकता है।
यह मामला केवल एक राजनीतिक नेता के खिलाफ कार्रवाई नहीं है, बल्कि यह पंजाब में फैले नशे के कारोबार और उससे जुड़ी राजनीति के खिलाफ एक सख्त संदेश भी है। विजिलेंस और SIT की रिपोर्ट के मुताबिक, मजीठिया जैसे बड़े नेताओं के खिलाफ अब ठोस कार्रवाई हो रही है, जो पहले सिर्फ आरोपों तक ही सीमित थी।
अब सबकी नजरें 2 जुलाई की अगली पेशी पर हैं, जब केस की आगे की स्थिति और खुलासे सामने आएंगे। पंजाब सरकार का दावा है कि यह कार्रवाई पूरी तरह सबूतों और पारदर्शिता पर आधारित है और किसी राजनीतिक दबाव में नहीं की जा रही है।
