मंगलवार को पश्चिमी जापान में एक बार फिर धरती कांप उठी। जापान मौसम विज्ञान एजेंसी (JMA) के मुताबिक, भूकंप की तीव्रता 6.2 मैग्नीट्यूड मापी गई। भूकंप का केंद्र शिमाने प्रीफेक्चर के पूर्वी हिस्से में बताया गया है। झटके काफी तेज़ थे, जिससे आसपास के इलाकों में लोग दहशत में आ गए। हालांकि राहत की बात यह रही कि फिलहाल किसी तरह के जानमाल के नुकसान की पुष्टि नहीं हुई है।
सुनामी का कोई खतरा नहीं
भूकंप के बाद जापान मौसम विज्ञान एजेंसी ने साफ किया कि इस झटके से सुनामी का कोई खतरा नहीं है। इसलिए किसी भी तरह की सुनामी चेतावनी जारी नहीं की गई। प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे घबराएं नहीं, अफवाहों से बचें और सिर्फ़ सरकारी एजेंसियों की ओर से दी जा रही जानकारी पर ही भरोसा करें।
मैग्नीट्यूड को लेकर अलग-अलग आंकड़े
भूकंप की तीव्रता को लेकर अलग-अलग एजेंसियों के आंकड़ों में थोड़ा अंतर देखने को मिला। जहां जापान मौसम विज्ञान एजेंसी ने इसकी तीव्रता 6.2 बताई, वहीं अमेरिकी भूगर्भीय सर्वेक्षण (USGS) ने इसे 5.8 मैग्नीट्यूड रिकॉर्ड किया है। विशेषज्ञों के मुताबिक, अलग-अलग तकनीकी तरीकों की वजह से ऐसे आंकड़ों में मामूली अंतर आना सामान्य है।
सेना ने शुरू किया हवाई सर्वे
संभावित नुकसान का आकलन करने के लिए जापानी रक्षा मंत्रालय ने तुरंत कदम उठाए हैं। रक्षा मंत्रालय के अनुसार, सेना के हवाई जहाज़ों और हेलिकॉप्टरों से प्रभावित इलाकों का हवाई सर्वे किया जा रहा है। अब तक किसी बड़े नुकसान की खबर सामने नहीं आई है, लेकिन प्रशासन पूरी तरह सतर्क है।
यासुगी शहर में महसूस हुए तेज़ झटके
शिमाने प्रीफेक्चर के यासुगी शहर में भूकंप के झटके काफी तेज़ महसूस किए गए। यहां जापान के शिंदो स्केल पर लेवल 5 तक के झटके दर्ज किए गए। इस स्तर पर आमतौर पर घरों के अंदर रखा ढीला सामान गिर सकता है और वाहन चलाने वालों को संतुलन बनाए रखने में परेशानी हो सकती है। भूकंप के बाद स्थानीय प्रशासन और आपदा प्रबंधन टीमें अलर्ट मोड पर आ गई हैं।
लगातार भूकंपों से बढ़ी चिंता
गौरतलब है कि इससे पहले 31 दिसंबर को भी जापान में 6.0 तीव्रता का भूकंप आया था। वह भूकंप पूर्वी नोडा इलाके के तट के पास दर्ज किया गया था। लगातार आ रहे इन भूकंपों ने लोगों की चिंता बढ़ा दी है, खासकर इसलिए क्योंकि जापान आज भी 2011 की विनाशकारी आपदा की यादों से पूरी तरह उबर नहीं पाया है। उस समय आए 9.0 तीव्रता के भूकंप और सुनामी में करीब 18,500 लोग मारे गए या लापता हो गए थे।
