इंडोनेशिया के सुमात्रा द्वीप में गुरुवार सुबह तेज झटकों ने लोगों में दहशत फैला दी। आचे प्रांत के पास 6.4 तीव्रता का जोरदार भूकंप आया, जिसकी पुष्टि इंडोनेशियाई मौसम, जलवायु और भूभौतिकी एजेंसी (BMKG) ने की है। एजेंसी के अनुसार भूकंप की गहराई 10 किलोमीटर दर्ज की गई, जो इसे अपेक्षाकृत सतही भूकंप बनाती है। ऐसे भूकंप आमतौर पर ज्यादा नुकसान पहुंचा सकते हैं, हालांकि इस बार सुनामी का कोई खतरा नहीं बताया गया है।
लोग घरों से बाहर निकले, इमारतें हिलती रहीं
तेज झटके न केवल आचे में बल्कि आसपास के कई इलाकों में भी महसूस किए गए। भूकंप इतना जोरदार था कि घर, इमारतें और दुकानों के शटर तक हिलने लगे। लोग घबराकर अपने घरों से बाहर निकल आए और सुरक्षित स्थानों की ओर गए। कुछ मिनटों तक माहौल में अफरा-तफरी की स्थिति रही।
हालांकि अभी तक किसी बड़े नुकसान या जनहानि की सूचना नहीं मिली है, लेकिन स्थानीय प्रशासन सतर्क है और स्थिति पर करीब से नजर बनाए हुए है।
इंडोनेशिया पर लगातार आपदाओं का दबाव
इंडोनेशिया इन दिनों प्राकृतिक आपदाओं की लगातार मार झेल रहा है। भूकंप से ठीक एक दिन पहले उत्तरी सुमात्रा प्रांत में मूसलाधार बारिश, अचानक आई बाढ़ और भूस्खलन के कारण हालात बेहद खराब हो गए थे। इस हादसे में 24 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है।
बारिश इतनी भारी थी कि कई नदियों के तटबंध टूट गए। पहाड़ी इलाकों में भूस्खलन के कारण कीचड़ भर जाने से राहत और बचाव टीमें 11 प्रभावित शहरों तक नहीं पहुंच पा रही हैं। कई गांवों का संपर्क भी टूट गया है।
‘रिंग ऑफ फायर’—इंडोनेशिया पर बना रहता है खतरा
इंडोनेशिया प्रशांत महासागर के जिस क्षेत्र में स्थित है, उसे ‘रिंग ऑफ फायर’ कहा जाता है। यह दुनिया के उन क्षेत्रों में से है जहां सबसे ज्यादा भूकंप और ज्वालामुखी विस्फोट आते हैं। यही वजह है कि यहां प्राकृतिक आपदाओं का खतरा हमेशा बना रहता है।
कुछ दिन पहले भी आया था भूकंप
यह हाल के दिनों में दूसरा बड़ा भूकंप है।
5 नवंबर 2025 को सुलावेसी द्वीप में 6.2 तीव्रता का भूकंप आया था। उस समय किसी नुकसान की खबर नहीं थी, लेकिन आज के झटकों ने लोगों की चिंता बढ़ा दी है।
इंडोनेशिया इस समय लगातार प्राकृतिक आपदाओं से जूझ रहा है। एक ओर बाढ़ और भूस्खलन ने भारी तबाही मचाई, वहीं दूसरी ओर सुमात्रा में आए शक्तिशाली भूकंप ने लोगों में दहशत पैदा कर दी है। राहत की बात यह है कि इस बार सुनामी का कोई खतरा नहीं है, लेकिन सरकार और राहत टीमें पूरी तैयारी के साथ स्थिति पर निगरानी बनाए हुए हैं।
