भारत के कार बाजार में फ्यूल को लेकर ग्राहकों की पसंद तेजी से बदलती दिखाई दे रही है। E20 पेट्रोल यानी पेट्रोल में 20 प्रतिशत तक इथेनॉल मिलाने को लेकर चल रही बहस के बीच जुलाई 2026 के आंकड़ों में पेट्रोल कारों की हिस्सेदारी घट गई। वहीं CNG, इलेक्ट्रिक और डीजल कारों की तरफ ग्राहकों का रुझान बढ़ा है।
पेट्रोल और दूसरी कारों के बीच अंतर बेहद कम
फेडरेशन ऑफ ऑटोमोबाइल डीलर्स एसोसिएशन यानी FADA के आंकड़ों के मुताबिक जुलाई में पेट्रोल कारों की हिस्सेदारी 41.68 प्रतिशत रही। दूसरी तरफ CNG, हाइब्रिड और इलेक्ट्रिक कारों को मिलाकर हिस्सेदारी 40.59 प्रतिशत पहुंच गई। यानी दोनों के बीच केवल करीब 1.09 प्रतिशत अंक का अंतर रह गया है। एक साल पहले यह अंतर 13 प्रतिशत से ज्यादा था।
CNG और EV की तरफ बढ़ा रुझान
जुलाई में CNG कारों की हिस्सेदारी करीब 24.67 प्रतिशत, हाइब्रिड कारों की 8.02 प्रतिशत और इलेक्ट्रिक कारों की 7.90 प्रतिशत रही। इससे पता चलता है कि ग्राहक अब सिर्फ पेट्रोल पर निर्भर नहीं रहना चाहते। खासकर ईंधन की लागत और E20 को लेकर बनी अनिश्चितता के कारण कई खरीदार दूसरे विकल्पों को ज्यादा ध्यान से देख रहे हैं।
E20 को लेकर क्यों है चिंता?
E20 पेट्रोल में 20 प्रतिशत इथेनॉल मिलाया जाता है। इस ईंधन को लेकर कुछ वाहन मालिक माइलेज और पुराने वाहनों के फ्यूल सिस्टम से जुड़े सवाल उठा रहे हैं। Aaj Tak की रिपोर्ट के अनुसार सरकार ने संसद में बताया है कि पुराने वाहनों में E20 से माइलेज में करीब 6 प्रतिशत तक गिरावट हो सकती है और कुछ रबर पार्ट्स पर असर पड़ने की संभावना है।
डीजल कारों की मांग ने चौंकाया
डीजल कारों की मांग में भी जुलाई में बढ़ोतरी देखने को मिली। FADA के अनुसार डीजल कारों की बाजार हिस्सेदारी 17.73 प्रतिशत रही, जबकि पिछले साल जुलाई में यह करीब 17.97 प्रतिशत थी। हालांकि सालाना आधार पर हिस्सेदारी कम है, लेकिन पेट्रोल के मुकाबले डीजल की मांग में हालिया मजबूती ने बाजार का ध्यान खींचा है।
डीलरशिप पर बढ़ रहा पेट्रोल कारों का स्टॉक
ग्राहकों की बदलती पसंद का असर कार डीलरों पर भी पड़ रहा है। जुलाई में कंपनियों ने डीलरों को करीब 4.69 लाख यात्री कारें भेजीं, जबकि खुदरा बिक्री लगभग 4.16 लाख यूनिट रही। इससे 52 हजार से ज्यादा वाहनों का अंतर बना। FADA के मुताबिक 25 प्रतिशत से ज्यादा डीलर इन्वेंट्री 60 से 70 दिन या उससे अधिक पुरानी हो चुकी है, जबकि सामान्य स्टॉक अवधि करीब 30 से 33 दिन मानी जाती है।
कार कंपनियों के सामने नई चुनौती
कार बाजार में कुल बिक्री मजबूत बनी हुई है। जुलाई में यात्री वाहनों की खुदरा बिक्री 4,16,555 यूनिट रही, जो सालाना आधार पर 19.13 प्रतिशत अधिक है। ऐसे में समस्या कारों की कुल मांग से ज्यादा ग्राहकों की बदलती फ्यूल पसंद की है। आने वाले त्योहारी सीजन में अगर CNG, हाइब्रिड और EV की मांग इसी तरह बढ़ती रही तो कंपनियों को उत्पादन और सप्लाई की रणनीति में बदलाव करना पड़ सकता है।
