यूरोप में जून 2026 के आखिर में पड़ी भीषण गर्मी ने जनजीवन पर गंभीर असर डाला है। नए आंकड़ों के अनुसार, इस हीटवेव के दौरान 27 यूरोपीय देशों में 10 हजार से अधिक अतिरिक्त मौतें दर्ज की गईं। विशेषज्ञों का कहना है कि यह सामान्य मौसम की तुलना में कहीं अधिक है और इतनी बड़ी संख्या में मौतें असाधारण गर्मी से जुड़ी मानी जा रही हैं।
बुजुर्ग सबसे अधिक प्रभावित
रिपोर्ट के अनुसार, सबसे ज्यादा असर 65 वर्ष से अधिक आयु के लोगों पर पड़ा। अनुमान है कि अतिरिक्त मौतों में अधिकांश बुजुर्ग शामिल हैं। तेज गर्मी के कारण हृदय, श्वसन और अन्य गंभीर बीमारियों से पीड़ित लोगों की स्थिति तेजी से बिगड़ी। डॉक्टरों का मानना है कि लंबे समय तक अत्यधिक तापमान शरीर की सामान्य कार्यप्रणाली पर गहरा प्रभाव डालता है।
कई देशों में टूटा तापमान का रिकॉर्ड
फ्रांस, स्पेन, बेल्जियम, जर्मनी और ब्रिटेन सहित पश्चिमी यूरोप के कई हिस्सों में जून के अंतिम सप्ताह में तापमान सामान्य से काफी ऊपर पहुंच गया। कई शहरों में गर्मी के नए रिकॉर्ड बने। तेज धूप, गर्म हवाओं और लगातार ऊंचे तापमान ने लोगों के दैनिक जीवन को प्रभावित किया। कई स्थानों पर स्कूलों, परिवहन सेवाओं और सार्वजनिक गतिविधियों पर भी असर देखने को मिला।
जलवायु परिवर्तन को माना जा रहा बड़ा कारण
जलवायु वैज्ञानिकों का कहना है कि इस तरह की तीव्र गर्मी बिना मानवजनित जलवायु परिवर्तन के लगभग असंभव मानी जाती। शोधकर्ताओं के अनुसार, बढ़ते वैश्विक तापमान के कारण हीटवेव पहले की तुलना में अधिक तीव्र और लंबे समय तक रहने लगी हैं। विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि यदि तापमान बढ़ने की रफ्तार नहीं रुकी, तो भविष्य में ऐसे हालात और गंभीर हो सकते हैं।
स्वास्थ्य सेवाओं पर भी बढ़ा दबाव
अत्यधिक गर्मी के दौरान अस्पतालों और स्वास्थ्य सेवाओं पर अतिरिक्त दबाव देखा गया। कई देशों में हीट स्ट्रोक, डिहाइड्रेशन और सांस संबंधी समस्याओं के मरीजों की संख्या बढ़ी। कुछ इलाकों में जंगल की आग, बिजली व्यवस्था पर दबाव और परिवहन सेवाओं में बाधा जैसी समस्याएं भी सामने आईं। मौसम विशेषज्ञों का मानना है कि हीटवेव अब केवल मौसम की घटना नहीं रह गई है, बल्कि यह सार्वजनिक स्वास्थ्य और बुनियादी ढांचे के लिए भी बड़ी चुनौती बनती जा रही है।
