भारतीय शेयर बाजार में मंगलवार, 11 अगस्त 2026 को दबाव देखने को मिला। बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) का प्रमुख इंडेक्स सेंसेक्स 388.19 अंक यानी 0.49% गिरकर 78,154.25 के स्तर पर बंद हुआ। वहीं नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) का निफ्टी भी 112.10 अंक टूटकर 24,471.70 पर पहुंच गया।
कच्चे तेल की कीमतों ने बढ़ाई चिंता
बाजार में गिरावट की सबसे बड़ी वजहों में कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें शामिल रहीं। अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड ऑयल की कीमत करीब 90 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई। यह जुलाई के अंत के बाद का ऊंचा स्तर बताया जा रहा है। अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौते की उम्मीद कमजोर होने से तेल की कीमतों पर दबाव बढ़ा है।
भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा कच्चे तेल के आयात से पूरा करता है। ऐसे में तेल महंगा होने पर देश के आयात बिल, कंपनियों की लागत और महंगाई पर असर पड़ने की चिंता निवेशकों के बीच बनी रहती है।
कई सेक्टरों में बिकवाली
मंगलवार को बाजार में व्यापक स्तर पर कमजोरी रही। रिपोर्ट के मुताबिक 16 प्रमुख सेक्टरों में से 10 सेक्टर गिरावट के साथ बंद हुए। कंज्यूमर कंपनियों में करीब 1.2% की कमजोरी देखी गई, जबकि वित्तीय शेयरों में भी लगभग 0.4% की गिरावट रही। रियल्टी, FMCG और सीमेंट कंपनियों के शेयरों पर भी बिकवाली का दबाव रहा।
रुपये पर भी दबाव
शेयर बाजार की कमजोरी के बीच भारतीय रुपया भी दबाव में रहा। मंगलवार को रुपया करीब 13-15 पैसे कमजोर होकर 95.43 रुपये प्रति डॉलर के आसपास बंद हुआ। कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों को रुपये पर दबाव बढ़ाने वाले प्रमुख कारणों में माना गया।
कुछ शेयरों में दिखी मजबूती
जहां प्रमुख इंडेक्स में गिरावट रही, वहीं कुछ कंपनियों के शेयरों में अच्छी खरीदारी भी देखने को मिली। Gland Pharma के शेयर में करीब 9.6% की तेजी आई। कंपनी के तिमाही नतीजे बाजार की उम्मीदों से बेहतर रहने के बाद शेयर में मजबूत खरीदारी देखने को मिली। दूसरी तरफ Zee Entertainment और Dilip Buildcon जैसे शेयरों में कमजोरी रही।
बाजार में कंपनियों के मजबूत तिमाही नतीजों और अगस्त में विदेशी निवेश की वापसी से कुछ सकारात्मक संकेत भी हैं। अगस्त में अब तक विदेशी निवेशकों की ओर से करीब 1.5 अरब डॉलर का निवेश आया है, जबकि जुलाई में यह आंकड़ा करीब 2.1 अरब डॉलर था। इसके बावजूद बढ़ता क्रूड और वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव फिलहाल बाजार के लिए बड़ी चिंता बने हुए हैं।
