पश्चिम एशिया में बढ़ते युद्ध और तनाव का असर वैश्विक ऊर्जा बाजार पर साफ दिखाई दे रहा है। तेल और गैस की सप्लाई प्रभावित होने के कारण इनके दाम तेजी से बढ़ रहे हैं। खासतौर पर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में बाधा आने से दुनिया की लगभग 20 प्रतिशत ऊर्जा सप्लाई प्रभावित हुई है। आमतौर पर ऐसे हालात में सोना और चांदी जैसी कीमती धातुओं की कीमतें बढ़ जाती हैं, लेकिन इस बार स्थिति कुछ अलग देखने को मिल रही है।
सोना-चांदी के दाम में गिरावट
शुक्रवार को एमसीएक्स (MCX) पर सोने और चांदी की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई। 10 ग्राम सोना करीब 100 रुपये गिरकर 1,58,400 रुपये के आसपास बंद हुआ। वहीं चांदी करीब 8,683 रुपये गिरकर 2,59,279 रुपये प्रति किलो पर पहुंच गई। इससे पहले युद्ध शुरू होने से पहले सोना और चांदी अपने रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गए थे, लेकिन उसके बाद कीमतों में लगातार गिरावट देखने को मिल रही है।
रिकॉर्ड हाई से काफी नीचे कीमत
सोने का रिकॉर्ड हाई करीब 1.93 लाख रुपये तक पहुंच चुका है, जबकि चांदी का रिकॉर्ड स्तर लगभग 4.20 लाख रुपये प्रति किलो रहा है। मौजूदा कीमतों को देखें तो सोना अपने रिकॉर्ड स्तर से करीब 34,600 रुपये सस्ता है और चांदी लगभग 1.60 लाख रुपये नीचे कारोबार कर रही है।
तेल की कीमतों में तेजी
पश्चिम एशिया में तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल आया है। WTI कच्चे तेल की कीमत 60 डॉलर प्रति बैरल से बढ़कर करीब 110 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई है। इससे दुनिया भर में महंगाई बढ़ने का खतरा भी बढ़ गया है।
मजबूत डॉलर बना बड़ी वजह
विशेषज्ञों का कहना है कि सोने और चांदी की कीमतें नहीं बढ़ने की सबसे बड़ी वजह अमेरिकी डॉलर की मजबूती है। जब वैश्विक बाजार में अनिश्चितता बढ़ती है तो निवेशक अक्सर सुरक्षित निवेश के रूप में डॉलर की ओर रुख करते हैं। हाल के हफ्तों में डॉलर मजबूत हुआ है, जिसका सीधा असर सोने और चांदी की कीमतों पर पड़ा है।
ब्याज दरों का भी असर
इसके अलावा कई देशों में ऊंची ब्याज दरें भी सोने की कीमतों को प्रभावित कर रही हैं। जब ब्याज दरें ज्यादा होती हैं तो निवेशक सोने की बजाय अन्य निवेश विकल्पों को ज्यादा महत्व देते हैं। इसी कारण सोने और चांदी में तेजी नहीं आ पा रही है।
आगे क्या हो सकता है
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में सोने की कीमतों में फिर से बढ़त देखने को मिल सकती है। अनुमान है कि 2026 तक सोने के दाम में 15 से 20 प्रतिशत तक की वृद्धि हो सकती है। हालांकि यह काफी हद तक अमेरिकी अर्थव्यवस्था और वैश्विक हालात पर निर्भर करेगा। अगर अमेरिका में आर्थिक मंदी के संकेत मिलते हैं तो सोने और चांदी की कीमतों में तेज उछाल आ सकता है।
