सोने और चांदी के दामों में उतार–चढ़ाव लगातार बना हुआ है। मंगलवार की राहत के बाद बुधवार को इन कीमती धातुओं की कीमतें एक बार फिर बढ़ गईं। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर सोना 0.15% चढ़कर ₹1,22,818 प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया। वहीं चांदी भी 0.26% बढ़कर ₹1,55,048 प्रति किलोग्राम पर ट्रेड कर रही है।
दिल्ली के सर्राफा बाजार में कल आई भारी गिरावट
भले ही MCX पर आज कीमतें चढ़ी हों, लेकिन मंगलवार को राष्ट्रीय राजधानी के सर्राफा बाजार में सोने–चांदी की कीमतों में बड़ी गिरावट देखने को मिली थी।
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सोना ₹3,900 टूटकर ₹1,25,800 प्रति 10 ग्राम पर आ गया।
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99.5% शुद्धता वाला सोना ₹1,25,200 प्रति 10 ग्राम (सभी टैक्स समेत) पर दर्ज किया गया।
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चांदी की कीमत ₹7,800 की गिरावट के साथ ₹1,56,000 प्रति किलोग्राम (सभी टैक्स समेत) पर आ गई।
विशेषज्ञों का कहना है कि यह गिरावट अंतरराष्ट्रीय बाजार में कमजोर संकेतों के कारण हुई, जहां अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा अगले महीने ब्याज दरों में कटौती की उम्मीदें कम हो गई हैं।
क्यों घट–बढ़ रही हैं कीमतें?
सोने और चांदी की कीमतें इसलिए भी दबाव में हैं क्योंकि फेडरल रिजर्व द्वारा जारी किए जाने वाले आर्थिक संकेतकों से वैश्विक बाजार पूरी तरह प्रभावित होता है। जैसे ही यह संकेत मिलता है कि अमेरिका की अर्थव्यवस्था मजबूत है और ब्याज दरों में कटौती जल्दी नहीं होगी, सोने की मांग घट जाती है। इसका कारण यह है कि उच्च ब्याज दरों पर निवेशक सोने की बजाय बांड और अन्य साधनों में निवेश करना पसंद करते हैं।
इसी वजह से दुनिया भर में सोने के दाम हाल के दिनों में दबाव में रहे। भारत में भी इसका प्रभाव देखा जा रहा है।
विशेषज्ञों की नजर फेड मीटिंग और जॉब डेटा पर
एक वरिष्ठ विश्लेषक ने बताया कि बाजार की नजर अब फेडरल रिजर्व की नवीनतम बैठक की मिनट्स पर है जो बुधवार को जारी होंगी। इसके साथ ही गुरुवार को आने वाली सितंबर महीने की रोजगार रिपोर्ट भी बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
इन दोनों रिपोर्टों से यह संकेत मिलेगा कि—
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क्या अमेरिकी अर्थव्यवस्था अभी भी मजबूत बनी हुई है
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और ब्याज दरों में कटौती की संभावना क्या है
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर आंकड़े मजबूत आते हैं, तो सोने की कीमतों पर और दबाव बढ़ सकता है। लेकिन यदि आर्थिक संकेत कमजोर होते हैं, तो सोने–चांदी में तेजी लौट सकती है।
निवेशकों के लिए क्या है संकेत?
कीमतों में इस उतार–चढ़ाव से निवेशकों को सतर्क रहने की सलाह दी जा रही है। विशेषज्ञों के अनुसार बड़े फैसले लेने से पहले अंतरराष्ट्रीय संकेतों और फेडरल रिजर्व की नीति अपडेट का इंतजार करना बेहतर रहेगा।
