हफ्ते के अंतिम ट्रेडिंग दिन सोना और चांदी, दोनों की कीमतों में तेज़ उछाल देखने को मिला। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर चांदी ने इतिहास रच दिया और पहली बार 2 लाख रुपये प्रति किलो का आंकड़ा पार कर गई। वहीं सोना भी मजबूती के साथ ट्रेड कर रहा है। खबर लिखे जाते समय, सोना 1,33,918 रुपये पर और चांदी 2,00,040 रुपये प्रति किलो पर कारोबार कर रही थी।
अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में भी रौनक, कीमतें रिकॉर्ड स्तरों पर
केवल भारत ही नहीं, बल्कि वैश्विक बाज़ारों में भी कीमती धातुओं की कीमतों में तेज़ी देखने को मिल रही है। कमजोर अमेरिकी डॉलर, ब्याज दरों में संभावित कटौती और चांदी की कमी (सप्लाई शॉर्टेज) ने कीमतों को ऊपर धकेल दिया है।
अमेरिकी बाज़ार COMEX में भी चांदी $64.32 प्रति औंस की नई ऊंचाई पर पहुंच गई है। इसका सीधा असर भारतीय बाज़ार पर भी देखने को मिल रहा है।
चांदी इतनी महंगी क्यों हुई? जानिए बड़ी वजहें
मेटल विशेषज्ञों का कहना है कि चांदी की कीमतों में उछाल कई महत्वपूर्ण कारणों से हुआ है। इनमें सबसे बड़ी वजह है—वैश्विक स्तर पर कीमतों का रिकॉर्ड हाई पर पहुंचना। पिछले कुछ वर्षों में चांदी के भाव दोगुने से अधिक हो चुके हैं और 2025 तक यह $60–$64 प्रति औंस के बीच पहुंच गई है।
1. लगातार बढ़ती सप्लाई की कमी
दुनिया में लगातार पांचवें साल चांदी का उत्पादन मांग के मुकाबले बेहद कम है। यानी मार्केट में चांदी की कमी बनी हुई है, जिससे कीमतें बढ़ रही हैं।
2. उद्योगों में चांदी की भारी मांग
चांदी अब सिर्फ गहनों की धातु नहीं रह गई। यह तकनीक और ग्रीन एनर्जी सेक्टर की अहम जरूरत बन चुकी है। इसका इस्तेमाल यहां सबसे ज्यादा होता है:
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सोलर पैनल
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इलेक्ट्रिक वाहन (EVs)
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इलेक्ट्रॉनिक्स
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5G तकनीक
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सैमीकंडक्टर
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मेडिकल उपकरण
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बैटरी निर्माण
चांदी का उत्पादन बढ़ाना आसान भी नहीं है क्योंकि यह अधिकतर तांबा, जिंक या सीसा खनन के दौरान उप-उत्पाद के रूप में मिलती है।
भारत में चांदी इतनी क्यों बढ़ी? घरेलू कारण भी जिम्मेदार
अंतरराष्ट्रीय वजहों के अलावा भारत में चांदी की कीमतें कई घरेलू कारणों से भी तेजी से बढ़ी हैं:
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रुपये की गिरावट
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उच्च कस्टम ड्यूटी और GST
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विवाह और त्योहार सीजन की भारी मांग
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चांदी ETF में भारी निवेश
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सोने की तुलना में चांदी का सस्ता विकल्प होना
डॉलर मजबूत और रुपया कमजोर होने से कीमतों पर डबल असर पड़ता है और चांदी घरेलू बाज़ार में और महंगी हो जाती है।
कब तक रहेगी तेजी?
विशेषज्ञों का कहना है कि उद्योगों में मांग बढ़ने और सप्लाई तंगी के कारण चांदी की कीमतों में निकट भविष्य में और उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकते हैं। निवेशकों की नज़र अब आने वाले ग्लोबल आर्थिक संकेतों और ब्याज दरों पर बनी हुई है।
