पंजाब सरकार ने बाढ़ और बारिश से प्रभावित किसानों को राहत देते हुए आज से धान की सरकारी खरीद शुरू कर दी है। आमतौर पर खरीद 1 अक्टूबर से होती है, लेकिन इस बार 15 दिन पहले ही प्रक्रिया शुरू की गई है। राज्य में 1822 खरीद केंद्र स्थापित किए गए हैं और सरकार ने 190 लाख टन धान खरीदने का लक्ष्य तय किया है।
किसानों को दी गई अहम सलाह
किसानों को सलाह दी गई है कि वे आढ़तियों से मैपिंग करवा कर ही फसल मंडी में लाएं ताकि बिक्री में कोई दिक्कत न हो। बारिश के कारण धान में नमी की समस्या की आशंका जताई गई है। इसलिए सरकार ने किसानों से कहा है कि वे धान को सुखाकर ही मंडी में लाएं, इससे उन्हें परेशानी नहीं होगी।
मुख्यमंत्री करेंगे मंडियों का दौरा
मुख्यमंत्री भगवंत मान ने कहा है कि वे खुद मंडियों का दौरा कर खरीद व्यवस्थाओं का जायजा लेंगे। उन्होंने चेतावनी दी है कि नमी के नाम पर किसानों से किसी भी तरह की मनमानी बर्दाश्त नहीं की जाएगी और दोषियों पर सख्त कार्रवाई होगी। मंडी बोर्ड के अनुसार, मंडियों में बिजली, पानी और अन्य बुनियादी सुविधाओं का प्रबंध पहले ही कर लिया गया है।
बाढ़ प्रभावित मंडियों को फिर से बनाया जाएगा चालू
सरकार ने घोषणा की है कि जिन अनाज मंडियों में बाढ़ का असर पड़ा है, उन्हें 19 सितंबर तक पूरी तरह से चालू कर दिया जाएगा। पानी और गारे को हटाने के लिए एक विशेष अभियान शुरू किया गया है। किसान नेता सरवण सिंह पंधेर ने कहा कि बासमती पहले ही मंडियों में आनी शुरू हो गई है, लेकिन इसका रेट बाजार में 1 से 12 हजार रुपये कम है, जिस पर सरकार को ध्यान देना चाहिए।
शाम 6 बजे से सुबह 10 बजे तक धान की कटाई पर रोक
सरकार ने आदेश दिया है कि शाम 6 बजे से सुबह 10 बजे तक कंबाइन से धान की कटाई पर रोक रहेगी। इसके साथ ही पराली जलाने के खिलाफ सख्त कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई है। कई जिलों के डिप्टी कमिश्नर इस संबंध में आदेश जारी कर रहे हैं।
पराली प्रबंधन पर 500 करोड़ की योजना
सरकार ने पराली प्रबंधन के लिए 500 करोड़ रुपये की योजना बनाई है। धान की कटाई के दौरान 10 हजार से अधिक फील्ड अधिकारी तैनात किए जाएंगे। डीसी और एसएसपी खुद हालात की निगरानी करेंगे। मंडी बोर्ड एक कंट्रोल रूम स्थापित करेगा। साथ ही किसानों को पराली न जलाने के लिए 1,48,451 सीआरएम मशीनें उपलब्ध कराई जाएंगी।
