केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने संसद में E20 पेट्रोल को लेकर उठ रहे सवालों का जवाब देते हुए कहा कि इस ईंधन के इस्तेमाल से कुछ वाहनों का माइलेज 2 से 6 प्रतिशत तक कम हो सकता है। हालांकि उन्होंने साफ किया कि अब तक हुए परीक्षणों में E20 पेट्रोल की वजह से किसी भी वाहन के इंजन के खराब होने का कोई प्रमाण नहीं मिला है। सरकार का कहना है कि लोगों के बीच फैली कई आशंकाएं तथ्यों पर आधारित नहीं हैं और E20 ईंधन को व्यापक परीक्षण के बाद ही लागू किया गया है।
माइलेज कम होने की वजह क्या है?
गडकरी ने बताया कि E20 पेट्रोल में 20 प्रतिशत इथेनॉल और 80 प्रतिशत पेट्रोल होता है। इथेनॉल की ऊर्जा क्षमता सामान्य पेट्रोल से थोड़ी कम होती है, इसलिए कुछ वाहनों में माइलेज में हल्की कमी आ सकती है। यह कमी हर वाहन में समान नहीं होगी, क्योंकि इसका असर वाहन के मॉडल, इंजन की तकनीक, सड़क की स्थिति, ट्रैफिक और ड्राइविंग स्टाइल पर भी निर्भर करता है। सरकार के अनुसार अधिकांश मामलों में यह अंतर बहुत ज्यादा नहीं होता।
इंजन खराब होने के दावों को सरकार ने बताया गलत
पिछले कुछ समय से सोशल मीडिया पर यह दावा किया जा रहा था कि E20 पेट्रोल से इंजन जल्दी खराब हो सकता है। इस पर सरकार ने स्पष्ट किया कि परीक्षणों में ऐसा कोई सबूत नहीं मिला है। गडकरी ने कहा कि मारुति, टोयोटा सहित कई कंपनियों के वाहनों पर परीक्षण किए गए हैं और किसी भी वाहन में E20 के कारण इंजन फेल होने जैसी समस्या सामने नहीं आई। सरकार ने लोगों से अफवाहों के बजाय आधिकारिक जानकारी पर भरोसा करने की अपील की है।
देश को क्या होगा फायदा?
सरकार का कहना है कि E20 पेट्रोल का उद्देश्य केवल ईंधन बदलना नहीं, बल्कि कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता कम करना भी है। इथेनॉल का उत्पादन देश में होने से विदेशी मुद्रा की बचत होगी और किसानों को भी अतिरिक्त आय का अवसर मिलेगा। इसके अलावा इथेनॉल मिश्रित ईंधन से प्रदूषण कम करने और स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देने में भी मदद मिलने की उम्मीद है। यही कारण है कि सरकार इस कार्यक्रम को लंबे समय की ऊर्जा रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा मान रही है।
