पंजाब में आम आदमी पार्टी की भगवंत मान सरकार ने पर्यावरण संरक्षण को अपनी बड़ी प्राथमिकता बना लिया है। पिछले दो वर्षों में राज्य में हरियाली बढ़ाने की दिशा में ऐतिहासिक काम हुआ है। मुख्यमंत्री भगवंत मान के नेतृत्व में 2023-24 में सरकार ने 1.2 करोड़ पौधे लगाए, और अब 2024-25 के लिए 3 करोड़ पौधे लगाने का लक्ष्य रखा गया है।
यह अभियान केवल सरकारी कार्यक्रम नहीं, बल्कि एक जन आंदोलन का रूप ले चुका है। गांवों, स्कूलों, धार्मिक स्थलों और शहरों में लोग “हर घर बागीचा” की सोच को अपनाते हुए पौधे लगा रहे हैं।
पंजाब में यह पहल इसलिए जरूरी थी क्योंकि बीते दो दशकों में राज्य का वन क्षेत्र घट गया था। पहले पंजाब का वन क्षेत्र 4.80% था, जो घटकर 3.67% रह गया। इस गिरावट ने सरकार को चेताया और मान सरकार ने इसे सुधारने का जिम्मा उठाया।
पहले की सरकारों — कांग्रेस और अकाली दल — ने “ग्रीनिंग पंजाब मिशन” जैसे कई अभियान चलाए, लेकिन वे केवल कागजों पर रह गए। अकाली सरकार ने 40 करोड़ पौधे लगाने की घोषणा की थी, पर वास्तव में सिर्फ 5 करोड़ पौधे लगे और उनमें से भी आधे से ज्यादा सूख गए।
मान सरकार ने इस असफलता से सबक लेते हुए 2024 में ‘ट्री प्रिजर्वेशन पॉलिसी’ (Tree Preservation Policy) लागू की। इस नीति के तहत अब किसी भी पेड़ को बिना अनुमति नहीं काटा जा सकता। साथ ही, हर विकास परियोजना में “कंपेंसेटरी अफॉरेस्टेशन” यानी कटे हुए पेड़ों के बदले नए पेड़ लगाना अनिवार्य किया गया।
सरकार के प्रयासों का असर अब दिखने लगा है। भारत सरकार की फॉरेस्ट सर्वे रिपोर्ट 2023 के अनुसार, पंजाब में 177.22 वर्ग किलोमीटर ट्री कवर बढ़ा है — जो पिछले 15 वर्षों में सबसे बड़ी बढ़ोतरी है।
इसके अलावा, “नानक बागीची” और “पवित्र वन” जैसी योजनाओं से पौधारोपण को धार्मिक भावना से जोड़ा गया है। अब तक राज्य में 105 नानक बागीचियाँ और 268 पवित्र वन तैयार किए जा चुके हैं। ये छोटे-छोटे हरित स्थल न केवल ऑक्सीजन बढ़ा रहे हैं, बल्कि शहरों के लिए “ग्रीन लंग्स” भी बन रहे हैं।
किसानों को भी इस अभियान से जोड़ा गया है। “पंजाब हरियावली लहर” योजना के तहत 3.95 लाख ट्यूबवेलों के पास लगभग 29 लाख पौधे लगाए गए हैं।
मुख्यमंत्री भगवंत मान का संदेश है —
“पेड़ पंजाब की सांस हैं, इन्हें बचाना पंजाब का धर्म है।”
उनकी यह पहल अब एक आंदोलन बन चुकी है। आज पंजाब एक नए “हरियाले क्रांति” के दौर में है, जहां विकास और पर्यावरण दोनों साथ-साथ बढ़ रहे हैं।
