पंजाब के शिक्षा मंत्री हरजोत सिंह बैंस ने विधानसभा में केंद्र सरकार की विदेश नीति और ऊर्जा प्रबंधन को लेकर कड़ा हमला बोला। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार की नीतियों की वजह से देश एक गंभीर ऊर्जा संकट की ओर बढ़ रहा है। उनके अनुसार पेट्रोलियम, एलपीजी और एलएनजी के घटते भंडार को लेकर स्पष्ट जानकारी सामने नहीं आ रही है, जिससे कई राज्यों में चिंता का माहौल बन गया है।
ऊर्जा भंडार को लेकर सवाल
विधानसभा में चर्चा के दौरान हरजोत सिंह बैंस ने कहा कि केंद्र सरकार बार-बार यह दावा कर रही है कि देश में पेट्रोलियम और एलपीजी का पर्याप्त भंडार मौजूद है। लेकिन जमीनी हालात इन दावों से मेल नहीं खाते। उन्होंने आरोप लगाया कि कई जगहों पर वाणिज्यिक आपूर्ति प्रभावित हो रही है, जिससे संदेह पैदा हो रहा है कि वास्तविक स्थिति क्या है।
उन्होंने मांग की कि केंद्र सरकार देश में मौजूद पेट्रोलियम, एलपीजी और एलएनजी के वास्तविक स्टॉक की जानकारी सार्वजनिक करे, ताकि लोगों और राज्यों को सही स्थिति का पता चल सके।
खाद कारखानों के बंद होने पर चिंता
बैंस ने पंजाब में खाद उत्पादन से जुड़ी समस्या पर भी गंभीर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि नंगल और बठिंडा में स्थित नेशनल फर्टिलाइजर्स लिमिटेड (एनएफएल) के यूनिट लगभग बंद हो चुके हैं। गैस की कमी के कारण इन कारखानों में उत्पादन रुकने की स्थिति बन गई है, जिसका सीधा असर किसानों पर पड़ सकता है।
उन्होंने कहा कि खरीफ सीजन नजदीक है और किसानों को बड़ी मात्रा में यूरिया और अन्य खाद की जरूरत होगी। अगर उत्पादन नहीं हुआ तो किसानों के सामने बड़ी समस्या खड़ी हो सकती है।
पंजाब के साथ भेदभाव का आरोप
हरजोत सिंह बैंस ने यह भी आरोप लगाया कि जब पंजाब के खाद कारखानों को गैस की कमी के कारण बंद होना पड़ रहा है, तब हरियाणा के पानीपत स्थित एनएफएल प्लांट को पूरी क्षमता के साथ गैस आपूर्ति दी जा रही है। उन्होंने इसे पंजाब के साथ भेदभाव करार दिया और कहा कि यदि यह भेदभाव नहीं है तो फिर इसे क्या कहा जाएगा।
उन्होंने कहा कि पंजाब की कृषि अर्थव्यवस्था पहले ही कई चुनौतियों का सामना कर रही है। ऐसे समय में खाद कारखानों का बंद होना किसानों के लिए और बड़ी समस्या पैदा कर सकता है।
आने वाले समय को लेकर चेतावनी
बैंस ने चेतावनी दी कि फिलहाल यह स्थिति छोटी लग सकती है, लेकिन अगर समय रहते इसका समाधान नहीं किया गया तो देश को पेट्रोल और डीजल की कमी का सामना भी करना पड़ सकता है। उन्होंने कहा कि इसका असर केवल कृषि क्षेत्र तक सीमित नहीं रहेगा बल्कि कई अन्य क्षेत्रों पर भी पड़ेगा।
कई क्षेत्रों पर पड़ सकता है असर
उन्होंने कहा कि यदि ऊर्जा आपूर्ति में इसी तरह की समस्या बनी रही तो इसका असर शिक्षा संस्थानों, पर्यटन और अन्य सेवाओं पर भी पड़ सकता है। उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि हॉस्टल की मेस तक बंद हो सकती हैं और पर्यटन उद्योग भी प्रभावित हो सकता है।
केंद्र से पारदर्शिता की मांग
अपने भाषण के अंत में बैंस ने कहा कि देश के लोगों को ऊर्जा भंडार की वास्तविक स्थिति जानने का अधिकार है। उन्होंने केंद्र सरकार से अपील की कि पेट्रोलियम, एलपीजी और एलएनजी के स्टॉक की सच्चाई सार्वजनिक की जाए और राज्यों के साथ समान व्यवहार सुनिश्चित किया जाए।
उन्होंने यह भी कहा कि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए तो आने वाले समय में यह समस्या और गंभीर रूप ले सकती है।
